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ग्राम सभा की मंजूरी बिना बना मनरेगा चेक डेम ग्रामीणों का आरोप |

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रामानुजगंज (गौरव) ! रामचंद्रपुर जनपद पंचायत ही नहीं बलरामपुर जिले का लगभग सभी जनपद पंचायतो में मजदूरो के द्वारा काम न कराकर मशीनो का उपयोग मनरेगा के कार्यो में हो रहा है मगर मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी इन सब से गाफिल या कार्यवाई करने का खानापूर्ति करते रहते है | ऐसा ही मामला रामचंद्रपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत इंदरपुर में मनरेगा के तहत स्वीकृत चेक डेम निर्माण कार्यों को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना किया गया और मजदूरों से काम कराने के बजाय मशीनों का उपयोग कर निर्माण कराया गया। मामले की शिकायत कलेक्टर और जनपद पंचायत के सीईओ से की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए और जांच टीम गांव पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और विकास कार्यों को जनभागीदारी के माध्यम से पूरा करना है। लेकिन इंदरपुर में चेक डेम निर्माण कार्य में इस योजना के नियमों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों का चयन ग्राम सभा समिति की अनुमति के बिना ही कर लिया गया, जबकि नियमानुसार ग्राम सभा की सहमति आवश्यक होती है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चेक डेम निर्माण के दौरान जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई। इससे गांव के मजदूरों को काम नहीं मिल सका और मनरेगा के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण स्थल पर जेसीबी मशीन के बकेट के निशान भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो मशीनों के उपयोग की पुष्टि करते हैं। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नियमों को दरकिनार कर मशीनों से काम कराया गया | इससे पंचायत और विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने जेसीबी से हो रहे कार्यों के फोटो और वीडियो भी अपने मोबाइल में कैद किए थे। इन तस्वीरों और वीडियो को उन्होंने अधिकारियों को भेजा और सोशल मीडिया ग्रुप में भी साझा किया। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया और जांच के लिए टीम गठित की गई। जांच टीम ग्राम पंचायत इंदरपुर पहुंची और चेक डेम निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। टीम ने मौके की स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से भी जानकारी ली। हालांकि निरीक्षण के बाद भी कई ग्रामीण संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों और शासन स्तर पर भी शिकायत करेंगे। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में अनियमितता होने से गांव के गरीब मजदूरों का नुकसान हो रहा है। रामानुजगंज में बैठे मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी अभिषेक द्वेदी चाहे कितनी भी जाँच की बात कर ले मगर उनके रहते मनरेगा के तहत कार्यो में मजदूरो की भागीदारी कभी पूरी नहीं होगी | कई पंचायतो में मशीनो से काम धड़ल्ले से हो रहा है मगर इन साहब को कोई खबर ही नही कैसा कायर्क्रम अधिकारी है कि मनरेगा के कार्यो में मजदूरो की जगह जेसीबी एवं ट्रेक्टर का उपयोग हो रहा है और ये साहब सोये हुए है| अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।