रामानुजगंज (गौरव) ! बलरामपुर जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मनीराम यादव पर पूर्व पदस्थापना के दौरान वित्तीय अनियमितता, लापरवाही और कथित उगाही जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं, बावजूद इसके उन्हें बलरामपुर जिले की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, लुंड्रा कायर्काल के दौरान लगभग ढाई करोड़ रुपये के गबन प्रकरण में उनका नाम सामने आया था। वहीं बगीचा में पदस्थ रहते हुए पेंशन भुगतान में लापरवाही के आरोप में उनके खिलाफ निलंबन की कारर्वाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद बलरामपुर में डीईओ पद पर उनकी नियुक्ति विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बलरामपुर में पदभार ग्रहण करने के बाद भी उनकी कार्यशैली को लेकर असंतोष बना हुआ है। विभागीय कमर्चारियों और कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। सूत्रों का कहना है कि कार्यालयीन कार्यप्रणाली में अनावश्यक दबाव और असामान्य वातावरण के कारण कमर्चारी असहज महसूस कर रहे हैं। इधर अतिथि शिक्षकों ने भी डीईओ पर कथित उगाही के आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की है। वहीं मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट ने भी उनकी नियुक्ति को लेकर राज्यपाल को शिकायत भेजी है, जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग से जवाब मांगा गया है। साथ ही डीईओ कार्यालय में आवक-जावक शाखा को मौखिक रूप से बंद करने के निर्देश दिए जाने और संबंधित क्लर्क को नोटिस जारी किए जाने से विभागीय माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। इन घटनाक्रमों के बीच जिले के शिक्षकों और कमर्चारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने गंभीर आरोपों और जांच के बावजूद आखिर मनीराम यादव को जिला शिक्षा अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई। हालांकि डीईओ श्री मनीराम यादव ने उक्त मामले में समस्त आरोपों को निराधार बताया है।
अतिथि शिक्षकों के आरोपों से घिरे जिला शिक्षा अधिकारी – जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर सुखिर्यो में है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों ने पूरे जिले में चर्चा का माहौल बना दिया है। अतिथि शिक्षकों द्वारा कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को ज्ञापन सौंपकर जांच और कारर्वाई की मांग किए जाने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस मामले की निष्पक्ष जांच कौन करेगा और क्या वास्तव में किसी प्रकार की कारर्वाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जिला शिक्षा अधिकारी श्री मनीराम यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि अतिथि शिक्षकों पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है तथा उनसे कथित रूप से बीस-बीस हजार रुपये की मांग की गई है। अतिथि शिक्षकों ने आरोप लगाया कि यदि रकम नहीं दी गई तो उनकी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस आरोप के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग सहित पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई है। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही कम मानदेय में कार्य कर रहे हैं और ऐसे में इस प्रकार की कथित मांग उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से परेशान करने वाली है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय स्तर पर लंबे समय से मनमानी और दबाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कारर्वाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो।
कई कारनामे जाँच के दायरे में – अपने कार्यकाल में चाहे डीईओ हो या बीईओ हमेशा विवादों में रहा इनके ऊपर कई तरह के आरोप विभागीय एवं आम कर्मचारी के तरफ से लगाये गए जिनमे कई आरोपों पर जाँच जारी है एवं कई जाँच उपरांत निलंबन की करवाई भी हुई है | सूत्र बताते है की ये महाशय जेल यात्रा भी कर चुके है इन पर शासकीय राशी का गबन (पेंशन प्रकरण के निराकरण बगीचा बीईओ ) गबन के कारण इन्हें निलंबित भी किया गया है | विकासखंड शिक्षा अधिकारी लुण्ड्रा में जाँच बुझकर वित्तीय अनियमितता करते हुए शासन को दो करोड़ ब्यालीस लाख तिरानबे हजार पांच सौ एक रुपये की क्षति पहुचाई यह दिनका 17.06.2016 के अनुसार, दिनांक 29.10.2013 को प्रभार सौपने के पश्चात भी विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पदीय हैसियत से पांच लाख तिरपन हजार अड़तालीस रुपये का आहरण का दोषी पाया गया | जिससे इन्हें निलंबन कर दिया गया था |
जाँच की मांग – राष्ट्रीय मानवाधिकार सेवा ट्रस्ट अंबिकापुर के प्रदेश संगठन सचिव द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग रायपुर से दिनांक 17.03.2026 को मनीराम यादव वर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर लगे सभी आरोपों की जाँच करने का अनुरोध किया गया था | जो अभी तक क्या जाँच हुई मलूम नही |
जवाब नहीं – इस संबध में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी से बात करने पर कोई जानकारी नहीं दी एवं कहा की मैंने कोई गलत नहीं किया है |

