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चार महीने में ही रजिस्टर्ड हुए 910 एफपीओ, 6865 करोड़ में से ऐसे मिलेगी 15 लाख रुपये की मदद

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पीएम किसान एफपीओ योजना (PM Kisan FPO Yojana) के तहत चार महीने में ही 910 किसान उत्‍पादक संगठन (FPO-Farmer Producer Organisation) रजिस्टर्ड हो चुके हैं. इसमें 8.62 लाख किसान जुड़ गए हैं. जबकि यह लॉकडाउन का समय था. एफपीओ किसानों का एक समूह होता है जो कृषि उत्पादन काम करके उससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां चलाता है. किसानों का कोई समूह इसे रजिस्टर्ड करवाकर खेती से जुड़े कई फायदे ले सकता है. केंद्र सरकार एफपीओ को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी. यह संगठन कॉपरेटिव पॉलिटिक्स से बिल्कुल अलग होंगे.

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि मोदी सरकार 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाएगी. साल 2024 तक इस पर 6865 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसका रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट में ही होगा, इसलिए इसमें वही सारे फायदे मिलेंगे जो एक कंपनी को मिलते हैं. इससे कुल 30 लाख किसान लाभान्वित होंगे.

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?

एफपीओ लघु व सीमांत किसानों का एक समूह होगा, जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा. सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी. अगर अकेला किसान अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है. एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, क्योंकि बारगेनिंग कलेक्टिव होगी.

कैसे मिलेंगे 15 लाख रुपये

राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने बताया कि सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एफपीओ बनाने के लिए जाने माने अर्थशास्त्री डॉ. वाईके अलघ के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी. इसके तहत कम से 11 किसान संगठित होकर अपनी एग्रीकल्चर कंपनी या संगठन बना सकते हैं. मोदी सरकार जो 15 लाख रुपये देने की बात कर रही है उसका फायदा कंपनी का काम देखकर तीन साल में दिया जाएगा.

कौन करेगा सहायता

एफपीओ का गठन और बढ़ावा देने के लिए अभी लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (Small Farmers’ Agri-Business Consortium) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) काम कर रहे हैं. दोनों संस्थाओं के मिलाकर करीब पांच हजार एफपीओ पहले से ही रजिस्टर्ड हैं. मोदी सरकार इसे और बढ़ाना चाहती है. इसलिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को भी इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है.

कैसे मिलेगी आर्थिक मदद

>>अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम कर रहा है तो कम से कम 300 किसान उससे जुड़े होने चाहिए. यानी एक बोर्ड मेंबर पर कम से कम 30 लोग सामान्य सदस्य हों. पहले 1000 था.

>>पहाड़ी क्षेत्र में एक कंपनी के साथ 100 किसानों का जुड़ना जरूरी है. उन्हें कंपनी का फायदा मिल रहा हो.

>>नाबार्ड कंस्ल्टेंसी सर्विसेज आपकी कंपनी का काम देखकर रेटिंग करेगी, उसके आधार पर ही ग्रांट मिलेगी.

>>बिजनेस प्लान देखा जाएगा कि कंपनी किस किसानों को फायदा दे पा रही है. वो किसानों के उत्पाद का मार्केट उपलब्ध करवा पा रही है या नहीं.