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अनुमोदन किसी का, चेक किसी और के नाम-और सीमा से बाहर एकमुश्त भुगतान

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रामानुजगंज (गौरव) ! बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सूचना का अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेज़ों ने स्वास्थ्य विभाग की भुगतान प्रणाली में गंभीर अनियमिता की ओर संकेत होता है। दस्तावेज़ों के अनुसार, तत्कालीन BMO/DDO हेमंत दीक्षित एवं BPM गुलाबदास डहरिया के कार्यकाल में कई भुगतानों की नोटशीट में तो “संबंधित को भुगतान किया जाना लिखा गया है, लेकिन चेक काटने के प्रस्ताव में यह दर्ज नहीं किया गया कि चेक आखिर किसके नाम से जारी हुआ।
वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन – वित्तीय नियमों में यह अनिवार्य है कि चेक किस व्यक्ति/संस्था के नाम से काटा गया यह प्रस्ताव/रिकॉर्ड में स्पष्ट लिखा हो। RTI दस्तावेज़ों में चेक-प्रस्ताव में नाम का अभाव इस आशंका को जन्म देता है कि स्वीकृति किसी “संबंधित” के नाम से दर्शाई गई, लेकिन वास्तविक चेक किसी अन्य के नाम से काटा गया हो सकता है।
गड़बड़ी की आशंका – इस विरोधाभास से यह प्रश्न उठता है क्या भुगतान की स्वीकृति वैध नाम से दिखाई गई और राशि किसी तीसरे व्यक्ति/संस्था को दी गई? यदि ऐसा है, तो यह रिकॉर्ड-हेरफेर, फर्जी भुगतान और संभावित मिलीभगत की श्रेणी में आता है।
डिस्बर्समेंट कैपेसिटी से अधिक एक बार में भुगतान – RTI अभिलेख यह भी दर्शाते हैं कि निर्धारित डिस्बर्समेंट कैपेसिटी (भुगतान सीमा) से अधिक राशि का भुगतान एक ही बार में किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार सीमा से अधिक एकमुश्त भुगतान बिना विधिसम्मत प्रक्रिया/उच्च अनुमति के गंभीर वित्तीय अनियमितता है, इससे नियंत्रण तंत्र (Checks & Balances) निष्प्रभावी होता है और दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है। नाम-विहीन चेक प्रस्ताव सीमा से बाहर एकमुश्त भुगतान दोनों मिलकर मामले को उच्च-स्तरीय जांच योग्य बनाते हैं।
कई भुगतान संदेह के घेरे में – RTI से यह भी सामने आया है कि मितानिन/आशा वर्कर बैठकों तथा विशेष संरक्षित जनजातियों के परिवहन/कैंप व्यय,जिनके लिए अलग बजट मद निर्धारित है, उनका भुगतान PMJAY मद से किया गया। साथ ही यह स्पष्ट नहीं है कि इन भुगतानों को JDS बैठक में विधिवत स्वीकृति मिली थी या नहीं।
संयुक्त जिम्मेदारी – भुगतान प्रक्रिया में प्रस्ताव, संस्तुति और चेक निर्गमन की भूमिकाओं के कारण BMO हेमंत दीक्षित और BPM गुलाबदास डहरिया दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती है।
उच्च-स्तरीय जांच की ठोस मांग – सभी नाम-विहीन चेक-प्रस्तावों की अलग-अलग जांच, नोटशीट में उल्लिखित “संबंधित” और वास्तविक चेक-प्राप्तकर्ता का मिलान, डिस्बर्समेंट कैपेसिटी से अधिक एकमुश्त भूगतानों की वैधानिकता की समीक्षा, बैंक खातों/ट्रांजैक्शन ट्रेल की फॉरेंसिक जांच, PMJAY फंड उपयोग और JDS अनुमोदन की पुष्टि।
शासन से सीधे सवाल – जब नियम नाम लिखने को कहते हैं, तो चेक-प्रस्ताव में नाम क्यों नहीं? सीमा से अधिक राशि एक बार में क्यों दी गई?