भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती (Economic Slowdown) का दौर कोरोना संकट के पहले से चल रहा था. इसके बाद कोविड-19 (Covid-19) के प्रकोप ने हालात बद से बदतर कर दिए. मौजूदा हालात को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में मंदी (Recession) का दौर इस साल के आखिर तक जारी रहेगा. उम्मीद की जा रही है कि अगले साल यानी 2021 के शुरुआती महीनों से देश में मंदी का असर कम होना शुरू होगा. रॉयटर्स के पोल के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस प्रकोप के कारण खपत (Consumption) और कारोबारी गतिविधियों (Business Activities) में कमी के कारण हालात खराब होते चले गए.
इकोनॉमी को बचाने के लिए उठाने होंगे कई कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकर कोरोना संकट के कारण खराब हुए आर्थिक हालात को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus) की घोषणा कर चुकी है. वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मार्च से अब तक ब्याज दरों (Interest Rates) में 1.15 फीसदी यानी 115 आधार अंकों की कटौती कर चुकी है. ऐसे में साफ है कि देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक महामारी (Pandemic) के कारण बने हालात से बचाने के लिए अभी सरकार को काफी कुछ करना होगा.
भारत में इस समय दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले कहीं तेजी से संक्रमण (Infections) फैल रहा है. अब तक देश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों (Corona Positive Cases) की संख्या 33 लाख से ज्यादा हो चुकी है. इनमें से 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. इस समय करोड़ों लोग संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए अपने घरों में कैद हैं. दुनिया के दूसरे सबसे बड़ी आबादी वाले देश में लाखों लोगों की नौकरियां छिन (Job Loss) गई हैं. वहीं, करोड़ों लोगों का रोजगार ठप (Unemployment) हो चुका है.
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‘अर्थव्यवस्था को बचाने का हर कदम होगा नाकाफी’
आईएनजी में सीनियर एशिया इकोनॉमिस्ट प्रकाश सकपाल का कहना है, ‘यह संकट का सबसे कम असर हो सकता है, लेकिन इस तिमाही के दौरान तेजी से सामने आए संक्रमण के नए मामलों के आधार यह कहा जा सकता है कि अगले कुछ महीनों में देश की अर्थव्यवस्था के उबरने की कोई उम्मीद नहीं है. सार्वजनिक वित्त (Public Finance) और बढ़ती महंगाई (Rising Inflation) मैक्रो पॉलिसी (Macro Policy) में रोड़ा बन गई है. इसका सीधा मतलब है कि अर्थव्यवस्था को साल के बचे समय में उबारने के लिए उठाया जाने वाला हर कदम नाकाफी होगा.
इकोनॉमी के लिए अब तक के सबसे खराब हालात
कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के कारण पिछली तिमाही में कोराबारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहीं. रॉयटर्स के 50 अर्थशास्त्रियों (Economist) को शामिल कर किए गए 18-27 अगस्त के पोल के मुताबिक, पिछली तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 18.3 फीसदी कम (Shrank) हो सकती है. हालांकि, ये इससे पिछले पोल के 20 फीसदी के मुकाबले कुछ बेहतर है. फिर भी ये 1990 के मध्य में शुरू किए गए तिमाही डाटा के लिए आधिकारिक रिपोर्टिंग के लिहाज से अब तक की सबसे निचली दर होगी.



