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कोरोना काल में ड्रैगन ने जमकर खरीदा भारत से सामान, चीन में निर्यात 78 फीसदी बढ़ा

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पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के बीच टकराव के बाद भारत में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए अभियान चल रहा है. वहीं, दूसरी तरफ चीन ने भारतीय सामानों की जमकर आयात की है. पिछले साल की तुलना में इस साल जून में चीन में भारतीय सामानों का निर्यात 78 फीसदी बढ़ा है. क्रिसिल रिपोर्ट से इस बारे में जानकारी मिलती है. अप्रैल के महीने में इसमें 60.2 फीसदी की गिरावट आई थी. जुलाई में भी यह 10 फीसदी तक ​बढ़ा है. दरअसल, जिन देशों में कोरोना वायरस महामारी को काबू में कर लिया गया है, वहां की अर्थव्यवस्था के लिए निर्यात बढ़ा है. चीन के अलावा भारत से दूसरे एशियाई देशों में भी निर्यात बढ़ा है. भारत अपने कुल निर्यात का 16 फीसदी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में करता है.

इन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में घटा भारत का निर्यात
इस लिस्ट में मलेशिया, वियतनाम और सिंगापुर हैं. इन तीनों देशों में भारतीय सामान का निर्यात क्रमश: 76 फीसदी, 43 फीसदी और 37 फीसदी है. इन देशों को कोरोना वायरस महामारी पर काफी हद तक इस दौरान काबू करने में सफलता मिली है. वहीं, दूसरी तरफ पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में भारत का निर्यात घटा है. जिन देशों में भारत का निर्यात घटा है, उनमें अमेरिका, ब्राजील, यूनाइटेड किंग्डम. यहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं

क्रिसिल रिपोर्ट से पता चलता है कि उन देशों में निर्यात बढ़ेंगे, जहां कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं और आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. इस मामले में चीन दुनिया के सबसे बेहतर उदाहरण है. रिपोर्ट में विशेषतौर पर कहा गया है कि दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में चीन में कोरोना का कहर सबसे पहले आया और यह सबसे पहले उबरने में कामयाब भी रहा.

फरवरी महीने में चीन में कोविड-19 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े और फिर इस पर काबू पा लिया गया. इसके बाद यहां आर्थिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़नी शुरू की. एक तरफ कई प्रमुख अर्थव्यवस्था में मंदी की चपेट में रही है, वहीं दूसरी तरफ अप्रैल-जून तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 3.2 फीसदी रही.

क्रिसिल रिपोर्ट से पता चलता है कि उन देशों में निर्यात बढ़ेंगे, जहां कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं और आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. इस मामले में चीन दुनिया के सबसे बेहतर उदाहरण है. रिपोर्ट में विशेषतौर पर कहा गया है कि दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में चीन में कोरोना का कहर सबसे पहले आया और यह सबसे पहले उबरने में कामयाब भी रहा.

फरवरी महीने में चीन में कोविड-19 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े और फिर इस पर काबू पा लिया गया. इसके बाद यहां आर्थिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़नी शुरू की. एक तरफ कई प्रमुख अर्थव्यवस्था में मंदी की चपेट में रही है, वहीं दूसरी तरफ अप्रैल-जून तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 3.2 फीसदी रही.

चीन से व्यापार घाटा कम करने में मदद
चीन में भारतीय सामानों की निर्यात का प्रमुख कारण लोहा, स्टील, अयस्तक और जैविक पदार्थों की मांग रही. हालांकि, चीन से भारत में आयात कम घरेलू मांग की वजह से कम हुआ है. वहीं, चीनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध से भी इस आंकड़े में कमी आई है. इन दोनों आंकड़ों की वजह से भारत के व्यापार घाटे में कमी आई है.