केंद्र सरकार (Government of India) ने फैसला लेते हुए बासमती (Basmati Rice Export) और गैर बासमती चावल (Non Basmati Rice Export) के एक्सपोर्ट की शर्तों में ढील दी है. ये छूट यूरोपीयन देशों के लिए एक्सपोर्ट में दी गई है. वाणिज्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.आपको बता दें कि 25 फीसदी ग्लोबल शेयर के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा राइस एक्सपोर्ट करने वाला देश है.एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 38.36 लाख टन का हुआ है जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 38.55 लाख टन से थोड़ा कम है.
मूल्य के हिसाब से बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष 2019-20 के अप्रैल से फरवरी के दौरान 27,427 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में 28,604 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था.गैर-बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 11 महीनों में घटकर 46.56 लाख टन का ही हुआ, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में इसका निर्यात 68.25 लाख टन का हुआ था.
चावल की निर्यातक फर्म केआरबीएल लिमिटेड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल कुमार मित्तल ने हाल में एक इंटरव्यु में बताया था बासमती चावल की डिमांड सऊदी अरब, यमन, अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से लगातार बनी हुई है. कोरोना वायरस महामारी के समय भी इन देशों की आयात मांग अच्छी रही है जिस कारण घरेलू बाजार में चावल और धान की कीमतों में सुधार आया है.
भारत से बासमती चावल का सबसे बड़ा इंपोटर ईरान है, लेकिन ईरान में भारतीय एक्सपोटर्स का पैसा अभी भी फंसा हुआ है, इसलिए एक्सपोटर्स ईरान को सीधे एक्सपोर्ट नहीं कर रहे हैं.
बासमती और गैर बासमती चावल के एक्सपोर्ट की शर्तों में ढील दी गई➡️यूरोपीयन देशों के लिए एक्सपोर्ट शर्त में छूट➡️वाणिज्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया➡️चुनिंदा देशों को छोड़ एक्सपोर्ट शर्त में ढील pic.twitter.com/PURAP41bMI— CNBC-AWAAZ (@CNBC_Awaaz) August 11, 2020
14 से 15 लाट टन बासमती ईरान को होता है एक्सपोर्ट-ऑल इंडिया राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक विनोद कौल बताते हैं कि साल 2018-19 में ईरान को 14.5 लाख टन बासमती राइस एक्सपोर्ट किया गया था. हालांकि मार्च में कोरोना के चलते ईरान जाने वाले चावल पर इतना असर नहीं दिखाई दे रहा है. कौल बताते हैं कि खाड़ी देशों में सबसे ज़्यादा बासमती राइस एक्सपोर्ट होता है. लेकिन दूसरे देशों में 75 से 80 लाख टन गैर बासमती राइस भी एक्सपोर्ट होता है.



