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मुझे पता ही नहीं था कि नसीरुद्दीन शाह इतने खतरनाक हैं’: किरेन रिजिजू ने बताया, ‘शहरी दिमागी नक्सली’

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन अब राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में आ गया है. अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताया और सरकार की आलोचना की. शाह के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अभिनेता पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली’ तक कह दिया और उनके विचारों को भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक बताया.

किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मुझे लगता था कि नसीरुद्दीन शाह बस एक साधारण अभिनेता हैं. मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था… मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह एक खतरनाक ‘शहरी दिमागी नक्सली’ हैं! मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला. भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है.”

नसीरुद्दीन ने जताई थी नाराजगी
नसीरुद्दीन शाह ने 27 अक्टूबर को फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में गुस्सा जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और देश के युवाओं का ‘हौसला तोड़ने’ की कोशिश कर रही है. शाह ने ‘दिमागी नक्सल’ लिखा एक बैज भी लगा रखा था, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने दिखाया.

नसीरुद्दीन शाह ने सरकार से पूछा था सवाल
शाह ने हिंदी में कहा, “मैं गर्व से घोषणा करता हूं कि मैं ‘दिमागी नक्सल’ हूं. मुझे नहीं पता कि पहरेदारों ने मेरे जैसे लोगों को और कौन-कौन से उपनाम दिए हैं – राष्ट्रविरोधी, ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और न जाने क्या-क्या.” उन्होंने वीडियो में कहा, “मैं इस सरकार से एक सवाल पूछना चाहता हूं. हमारे देश के युवाओं का हौसला तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए आप और क्या करेंगे? आप कितना करेंगे? आप कहां तक जाएंगे?”

अभिनेता शाह (76) लगातार वीडियो पोस्ट करते रहे हैं. वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं. उन्होंने जुलाई में नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके की भी आलोचना की थी. पिछले सप्ताह शाह ने सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के छात्रों का भी समर्थन किया था, जो परिसर में हिंसक घटनाओं के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.

आमिर अजीज की लोकप्रिय कविता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, फिर सत्यजीत रे फिल्म संस्थान और अब जामिया मिल्लिया. छात्रों पर जो अत्याचार किए जा रहे हैं, उन्हें याद रखा जाएगा. सब कुछ याद रखा जाएगा.” उन्होंने बिस्मिल अजीमाबादी की प्रसिद्ध शायरी ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ की पंक्ति “देखना है जोर कितना बाजू-ए कातिल में है” भी सुनाई.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने छात्र संघ चुनावों के लिए निश्चित तारीख घोषित करने और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की है. छात्र संघ के चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं.