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दिल्ली में 842 करोड़ का मेडिकल घोटाला? 14.9 लाख की मशीन 37.8 लाख में खरीदी, 10 अहम फाइलें भी गायब

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दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाइयां और मेडिकल उपकरण खरीदने में बड़ा घोटाला होने के आरोप लगे हैं. एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की चार्जशीट में करीब 842 करोड़ रुपए के कथित सरकारी नुकसान का दावा किया गया है. आरोपों के मुताबिक जिस एक्स-रे मशीन की कीमत टैक्स समेत 14.9 लाख रुपए थी उसे दिल्ली सरकार की एजेंसी ने 37.8 लाख रुपए में खरीदा. यानी एक मशीन पर कीमत दोगुने से भी ज्यादा पहुंच गई. मामला यहीं नहीं रुका. जांच में सामने आया कि दो मशीनों के लिए टेंडर अपलोड किया गया था लेकिन ऑर्डर 448 मशीनों का दे दिया गया. इसके साथ ही खरीद से जुड़ी 10 अहम फाइलें भी गायब मिलीं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) से जुड़ा है. यही एजेंसी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दवाइयां, टीके और मेडिकल उपकरण खरीदती है. ACB ने 16 सितंबर को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें दवा कारोबारी राजीव रंगीला की कंपनियों F-Med Devices और M Sahib and Sons Private Limited को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. चार्जशीट में तीन सरकारी अधिकारियों के नाम भी हैं. इनमें CPA के प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रांगा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और CPA के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा शामिल हैं. अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया है. आरोपों पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है.

ACB के मुताबिक एक्स-रे मशीनों की खरीद में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं. आरोप है कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल पर सिर्फ दो मशीनों के लिए बोली डाली गई जबकि खरीद सैकड़ों मशीनों की होनी थी. जांच एजेंसी का दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि कम कंपनियां बोली में हिस्सा लें. बाद में F-Med Devices को 448 मशीनों का ऑर्डर मिला. चार्जशीट के मुताबिक कंपनी ने मशीन निर्माता Prognosis के साथ समझौता किया और खुद को उसका वितरक घोषित कराया. आरोप है कि दूसरी सरकारी एजेंसियों को 14.9 लाख रुपए में मिलने वाली मशीन CPA को 37.8 लाख रुपए में बेची गई. इस सौदे में कथित तौर पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का लाभ कमाया गया.

चादर से लेकर ORS तक खरीद में गड़बड़ी का आरोप
ACB ने आरोप लगाया है कि कथित अनियमितताएं केवल एक्स-रे मशीनों तक सीमित नहीं थीं. अस्पतालों के लिए चादरें और लिनेन खरीदने में 25 करोड़ रुपए के सामान पर 75 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया. वहीं 50 लाख ORS पैकेटों की कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई जबकि भुगतान 7.5 करोड़ रुपए का हुआ. सर्जिकल सामान की खरीद में भी 20 से 25 करोड़ रुपए की सामग्री के लिए करीब 100 करोड़ रुपए भुगतान किए जाने का आरोप है. चार्जशीट में दवाओं के मामले में कथित कमीशन 300 करोड़ रुपए तक बताया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम का हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया.

टेंडर की शर्तें अपने हिसाब से तय करने का आरोप
चार्जशीट के मुताबिक कुछ टेंडर ऐसी शर्तों के साथ तैयार किए गए जिनसे दूसरी कंपनियों की भागीदारी मुश्किल हो जाए. आरोप है कि अनुभव और कारोबार से जुड़ी शर्तें बहुत ऊंची रखी गईं जबकि कथित तौर पर पसंदीदा कंपनियों को जरूरी मानदंड पूरे नहीं करने के बावजूद योग्य घोषित कर दिया गया. ACB ने यह भी दावा किया कि GeM पोर्टल पर प्रक्रिया को अधूरा दिखाकर बाद में अपने सहयोगी कंपनियों को सप्लाई ऑर्डर देने की व्यवस्था की गई. टेंडर कमेटी के सदस्यों पर दबाव डालकर दस्तावेज मंजूर कराने के आरोप भी चार्जशीट में शामिल हैं.

10 अहम फाइलें गायब मिलने से बढ़ी चिंता
जांच एजेंसी के लिए खरीद प्रक्रिया से जुड़ी 10 फाइलों का नहीं मिलना भी गंभीर मामला है. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि इन फाइलों में खरीद की मांग करने वाली संस्थाओं और प्रक्रिया शुरू करने वाले अधिकारियों की जानकारी थी. टेंडर की शर्तें बनाने और तकनीकी तथा वित्तीय मूल्यांकन करने वाली समितियों का विवरण भी इनमें मौजूद था. इनके नहीं मिलने से जांच में मूल दस्तावेजों की कमी हुई. चार्जशीट में डॉ. रांगा पर टेंडर प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाने और सबूत नष्ट करने का आरोप है. डॉ. अग्रवाल पर भी खरीद आदेशों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं.

छापेमारी के बाद सामने आया मामला
यह मामला मई में तब सामने आया था जब शिकायतों के बाद सतर्कता विभाग ने CPA के कार्यालयों में छापेमारी की. डॉ. रांगा को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद डॉ. अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई. हजारों पन्नों की चार्जशीट में अभियोजन पक्ष के 84 गवाहों और 123 दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है. ACB के आरोप अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि खरीद प्रक्रिया में वास्तव में किन लोगों की क्या भूमिका थी और सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ.

दिल्ली मेडिकल घोटाले में कितने करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है?
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की चार्जशीट में दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाइयों और उपकरणों की खरीद में लगभग 842 करोड़ रुपये के कथित सरकारी नुकसान का दावा किया गया है।

दिल्ली के इस मेडिकल घोटाले में कौन सी एजेंसी और अधिकारी जांच के घेरे में हैं?
यह मामला दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) से जुड़ा है, जिसमें सीपीए प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रांगा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और पूर्व डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा आरोपी बनाए गए हैं।

एक्स-रे मशीनों की खरीद में किस तरह की अनियमितताएं और हेरफेर पाई गई हैं?
जीईएम पोर्टल पर केवल दो मशीनों के लिए टेंडर अपलोड किया गया था, जबकि 448 मशीनों का ऑर्डर दिया गया। इसके अलावा, 14.9 लाख रुपये की एक्स-रे मशीन को 37.8 लाख रुपये में खरीदा गया।