HDFC Bank में नेतृत्व बदलाव के बाद निवेशकों की नजर अब शेयर पर है. RBI की मंजूरी के बाद अनुप बागची को HDFC बैंक का नया MD और CEO नियुक्त किया गया है और वह 27 अक्टूबर 2026 से पद संभालेंगे. वह मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे. बैंक के शेयरों पर 2026 में दबाव रहा है. ऐसे में नए नेतृत्व से जुड़ी खबर के बाद निवेशक अब यह देख रहे हैं कि आगे बैंक की ग्रोथ, मुनाफे और मार्जिन पर क्या असर पड़ता है. हालांकि, सिर्फ CEO बदलने से शेयर की दिशा तय नहीं होती; आने वाले तिमाही नतीजे और बैंक के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस भी अहम रहेगा.
2026 में शेयर पर क्यों रहा दबाव?
HDFC Bank के शेयर ने इस साल कमजोर परफॉर्मेंस रहा है. साल 2026 में अब तक HDFC Bank के शेयर में करीब 30% की गिरावट आई है. 2008 के बाद किसी कैलेंडर ईयर में यह शेयर का सबसे खराब परफॉर्मेंस रहा है. 2008 के ग्लबोल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान शेयर करीब 42% गिरा था. नेतृत्व में बदलाव और बैंक की ग्रोथ से जुड़ी चिंताओं के अलावा डिपॉजिट जुटाने और नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव जैसे फैक्टर्स भी निवेशकों के लिए अहम रहे हैं. सितंबर 2026 में शेयर 52-वीक के लो लेवल ₹682 तक भी पहुंचा था. 1 अक्टूबर को शेयर करीब ₹719 पर बंद हुआ. बैंक के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता भी बाजार के लिए एक बड़ा मुद्दा रही. अब नए MD और CEO की नियुक्ति से कम से कम इस स्तर पर तस्वीर साफ हुई है.
कौन हैं अनुप बागची?
अनुप बागची को बैंकिंग, कैपिटल मार्केट, वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है. वह इससे पहले ICICI Securities और ICICI Bank में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. उनकी पिछली जिम्मेदारी ICICI Prudential Life Insurance के MD और CEO की थी. उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब HDFC Bank के सामने ग्रोथ और मुनाफे से जुड़े कई टारगेट हैं.
सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, CEO की नियुक्ति के बाद निवेशकों की नजर अब बैंक के कारोबारी अपडेट और तिमाही नतीजों पर रहेगी. डिपॉजिट ग्रोथ, लोन ग्रोथ, नेट इंटरेस्ट मार्जिन और मुनाफे में बदलाव जैसे आंकड़े शेयर के लिए अहम हो सकते हैं. इसके अलावा HDFC Bank के लिए मर्जर के बाद कारोबार को आगे बढ़ाना और क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो में सुधार भी अहम मुद्दे हैं. नए नेतृत्व की स्ट्रैटजी और उसके अमल पर बाजार की नजर रहेगी.
विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में कमी
HDFC Bank में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी घटी है. जून 2025 में FII हिस्सेदारी 48.84% थी, जो जून 2026 में घटकर 41.83% रह गई. सितंबर तिमाही की शेयरहोल्डिंग अभी सामने आनी बाकी है. दूसरी ओर, छोटे खुदरा निवेशकों की संख्या जून 2025 के करीब 36 लाख से बढ़कर जून 2026 में 44 लाख से ज्यादा हो गई. अब नए CEO के सामने बैंक की ग्रोथ, मार्जिन और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने से जुड़ी चुनौतियां रहेंगी. साथ ही, आने वाले तिमाही आंकड़े यह समझने में मदद करेंगे कि नेतृत्व बदलाव का कारोबारी परफॉर्मेंस पर क्या असर पड़ता है.



