Home Uncategorized अमृत सरोवर योजना में लाखों की अनियमितता का आरोप |

अमृत सरोवर योजना में लाखों की अनियमितता का आरोप |

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रघुनाथनगर (चंद्रकांत साहू) ! भारत सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना का बंटाधार शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी कैसे करते है इसका उदाहरण अगर देखना हो तो बलरामपुर जिले में आइये | बलरामपुर जिले के छः विकासखंड के किसी भी विकासखंड में सरकार की इस योजना का सौ प्रतिशत कही नहीं मिलेगा यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई | कही पर आधे अधूरे को ही पूरा दिखा कर राशी निकल ली गई तो कही पर मनरेगा का काम बताकर मशीनों से ही काम करवा लिया और फर्जी मस्टररोल बनाकर मनरेगा मजदूरो के नाम पर राशी निकलवा ली गई | उदाहरण गोबरा पंचायत का अमृत सरोवर योजना है | ऐसे ही ग्राम पंचायत सरना में बने अमृत सरोवर योजना का मामला है | जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और जल संकट से राहत देना है, अब छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सरना में गंभीर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने योजना के कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि अमृत सरोवर निर्माण एवं पंचायत के अन्य विकास कार्यों में पूर्व सचिव आनंद गुप्ता, रोजगार सहायक एवं कुछ स्थानीय लोगों की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोपों के अनुसार योजना के उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं हुए, जबकि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण या राशि व्यय दर्शाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की शिकायत जनपद स्तर तक पहुंचने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित अधिकारियों के संरक्षण के कारण मामले को लंबे समय से लंबित रखा गया है। बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़ वर्ष में कई सचिव बदले गए, लेकिन पंचायत के कार्यों का स्पष्ट प्रभार और जवाबदेही तय नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अमृत सरोवर एवं संबंधित कार्यों का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराया जाए। निर्माण कार्यों की भौतिक जांच कराई जाए। भुगतान, मस्टर रोल और रिकॉर्ड की जांच की जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर वसूली एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए। हालांकि पूरे मामले को लेकर जनपद पंचायत सीईओ के पास फोन से संपर्क करने की प्रयास की गई पर उन्होंने फोन ना उठाकर कोई भी जवाब देने से आनाकानी करते भी नजर आए जिससे यह साबित होता है कि जनपद सीईओ के संरक्षण में इस तरीके से कार्य किया जा रहे तभी तो डेढ़ साल हो गए अभी तक कोई भी लेखा जोखा वर्तमान सचिव को नहीं प्राप्त हुई है अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर जांच कराता है और क्या सरकारी योजना का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच पाया या नहीं।