रामानुजगंज (गौरव) ! जिला बलरामपुर के सनावल थाना क्षेत्र के ग्राम कुर्लूडीह निवासी श्यामसुन्दर गुप्ता के द्वारा धान तस्करी मामले में दो लोगो की गिरफ्तारी से बड़ा खुलासा हुआ है हालाँकि अभी भी कुछ खुलासे होना बाकी है | अवैध धान खरीदी और अंतरराज्यीय तस्करी के मामले ने अब गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और कथित राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में एक पटवारी संजय सोनी सहित एक और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के अनुसार अपराध क्रमांक 82/2025 की विवेचना के दौरान पटवारी संजय सोनी (32 वर्ष), निवासी सनावल तथा राजेश कुमार (39 वर्ष), निवासी तालकेश्वरपुर की संलिप्तता सामने आई। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मुख्य आरोपी श्याम सुंदर गुप्ता के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश से कम कीमत पर धान मंगवाया और छत्तीसगढ़ की सरकारी धान खरीदी मंडियों में अलग-अलग किसानों के खातों से बिक्री कर अवैध लाभ कमाया।
मोबाइल जांच से सामने आई पूरी साजिश – पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार आरोपी श्याम सुंदर गुप्ता के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कॉल रिकॉर्ड, लेनदेन और दस्तावेजों के जरिए इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि किसानों के खातों का इस्तेमाल कर फर्जी खरीदी दिखाई जाती थी और राशि की निकासी करा ली जाती थी।
26 दिसंबर को हुआ था बड़ा खुलासा – गौरतलब है कि 26 दिसंबर 2025 को राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध धान परिवहन करते एक पिकअप वाहन को पकड़कर जांच शुरू की थी। वाहन चालक की निशानदेही पर श्याम सुंदर गुप्ता के घर दबिश दी गई, जहां से लगभग 400 बोरी अवैध धान, 1.67 लाख रुपये नकद और बड़ी मात्रा में फर्जी बैंक व खरीदी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। बरामद दस्तावेजों में चेक बुक, किसान किताबें, केसीसी पासबुक, जिला सहकारी बैंक के पासबुक, तौल पर्चियां, विड्रॉल फॉर्म और खरीदी केंद्र से जुड़े कई रिकॉर्ड शामिल हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह घोटाला सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा था।
पहले ही दी गई थी निलंबन की अनुशंसा – इस मामले का सबसे अहम और चिंताजनक पहलू यह है कि संबंधित पटवारी को पिछले वर्ष धान खरीदी में अनिमिता पर निलंबित करने की अनुशंसा एसडीएम कार्यालय से की जा चुकी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि राजनीतिक दबाव के चलते फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया था। बताया जा रहा है कि लगभग 9 महीने तक पटवारी को कोई हल्का नहीं दिया गया, लेकिन 2025 धान खरीदी से ठीक पहले उसे तीन हलकों का प्रभारी बना दिया गया। इस निर्णय ने अब प्रशासनिक मंशा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों और शासन को भारी नुकसान – जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने किसानों के नाम पर दूसरे राज्य का धान खपाकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई, वहीं कई किसानों के खातों का दुरुपयोग कर उन्हें अनजाने में इस गड़बड़ी का हिस्सा बनाया गया।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना – पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में राजस्व, सहकारिता और खरीदी से जुड़े अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम जल्द सामने आ सकते हैं। यह मामला अब केवल अवैध धान खरीदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में पनपे एक संगठित घोटाले की तस्वीर पेश कर रहा है।
पटवारी का खेल – गिरदावली वर्ष 2024-25 में 1 अक्टूबर 2024 से 20 अक्टूबर 2024 तक यानि की बीस दिनों में ही पटवारी महोदय ने 61.33 हे. धान का रकबा बढाया गया | मतलब धान माफियाओ से किसानो के सरकारी कागजो में अपनी मर्जी से 153 एकड़ 32 डिसमिल क्यारी बनवाये और धान की फसल दिखाया | अधिकारियो को यह गिरदावली गलत लगा और पटवारी को लापरवाही बरतने के कारण ऑफिस अटैच कर दिया था | फिर अचानक इन्ही पटवारी को तीन हल्का, छः पंचायत आबंटित कर दिया गया पटवारी साहब ने इस मौके का भरपूर फ़ायदा उठाया और विचौलियो के ऊपर मेहरबानी की और मनमाने तरीके से रकबा प्रदान किया | अब सवाल यह उठता है की क्या एक पटवारी अपने स्तर पर इतना बड़ा घोटाला कर सकता है क्या सूत्रों के अनुसार श्यामसुंदर गुप्ता का रामानुजगंज के एक वरिष्ठ अधिकारी के घर पर शाम को अक्सर आते जाते देखा गया | क्या इसकी भी जाँच होगी ?


