Home छतीसगढ़ समाज कल्याण या समाज की अनदेखी? वृद्धाआश्रम भगवान भरोसे | भारत...

समाज कल्याण या समाज की अनदेखी? वृद्धाआश्रम भगवान भरोसे | भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सहायतित संचालित |

34
0

रामानुजगंज (गौरव) ! बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड में समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्ध, असहाय, लाचार जिन्हें अपनों ने छोड़ दिया उसके लिए सामाज कल्याण विभाग ने वृद्धाआश्रम बनाकर उनलोगों को बड़ी राहत दी | ग्राम रजखेता में संचालित परख वृद्धाआश्रम में अव्यवस्थाओं ने हर उस संवेदनशील सामाज को झकझोर दिया जो थोड़ी बहुत भी अपने अतीत से प्यार करते है और अपने वृद्ध माता पिता को असहाय न छोड़कर अपने साथ रखते है | इसके लिए कई ऐसे समाजसेवी संगठन मौजूद है जो अपने स्तर पर इन बुजुर्ग महिला पुरुष का ध्यान रखते है | मगर सामाज कल्याण द्वारा संचालित परख वृद्धाआश्रम जो ग्राम रजखेता में संचालित हो रहा है उसमे विभाग द्वारा लापरवाही कहे या संवेदनहीनता जिसके कारण वहां रह रहे कई वृद्ध एवं परख वृद्धा आश्रम के गलियारों में ही इस कड़कती ठण्ड में रहने सोने को मजबूर है | बताया जाता है की संचालनकर्ता द्वारा परख वृद्धाआश्रम में ताला बंद कर चले जाने के कारण बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा | जानकारी के अनुसार आश्रम में रहने वाली वृद्ध महिलाएं अंधेरे में खुद ही भोजन बनाने को मजबूर हैं. कारण बिजली का नहीं होना | सूत्रों के अनुसार वहां कार्य कर रहे कर्मचारियों को पिछले 8 महीनों से वेतन नहीं मिला, जिसके चलते अधिकांश कर्मचारी काम छोड़कर जा चुके हैं. परिणामस्वरूप आश्रम में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं और बुजुर्ग भोजन तक के लिए मोहताज हो गए हैं. मामले की सूचना मिलते ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे जहां उन्होंने किसी तरह समझाइश देकर कमरे का ताला खुलवाया और अस्थायी रूप से व्यवस्था बहाल करवाई. सवाल यह उठता है कि समाज कल्याण विभाग की निगरानी में चल रहे वृद्धाश्रम की यह हालत कैसे हुई और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई. दरअसल वृद्धा आश्रम में जहाँ स्टाफ का सेटअप 12 होना चाहिए वहां पर केवल एक स्टाफ ही पूरे वृद्ध आश्रम को संचालित कर रहा हैं |
वृद्धाश्रम में एक्सपायरी दवाइयाँ – जहां बुजुर्गों को सहारे की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहीं उन्हें अव्यवस्थाओं में जीवन बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है। आश्रम में ताला लगा देने से सभी को विशेष रूप से वृद्ध महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आश्रम परिसर से बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयाँ भी बरामद हुई हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इस परिस्तिथि में इस आश्रम को किसने लाया | इतने दिनों से अधिकारी कर्मचारी गहरी नींद में थे या किसी के जी हुजूरी में व्यस्त थे क्या जो आश्रम को मिलने वाली सुविधाए आश्रम में रहने वाले तक क्यों नहीं पहुची | क्या जिम्मेदार अधिकारियों व संचालकों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी । वृद्धों की सुरक्षा, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा यह मामला प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।

न भोजन की, न सोने की व्यवस्था – जिन बुजुर्गों का कोई आसरा नहीं होता, उनके लिए वृद्धाश्रम होता है. लेकिन यहां भी उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. आश्रम के सेटअप में 12 कर्मचारियों का होना बताया जा रहा है जिससे यह प्रतीत होता है की शासन की मंसा सही थी मगर निक्कमे अधिकारियो ने अपने नाकारापन से एक सही दिशा में बढ़ रही रास्ते को ख़त्म करना चाहा | आखिर कर्मचारियों की वेतन क्यों रोकी गई और इतनी बड़ी तादाद में कर्मचारी आश्रम छोड़ गये तो क्या सरकार तक सूचना नहीं पहुची तो हम मान लेते है की जिम्मेदार लोगो ने सवेदनहिनता का परिचय दिया है | क्योकि आश्रम में ताला बंद होने से वहां रह रहे बुजुर्गो को इस कड़ाके की ठण्ड में सोने के लिए न पर्याप्त बिस्तर था, न भोजन के लिए पर्याप्त राशन एवं रोशनी भी नही थे जिसके कारण अँधेरे में रहने को मजबूर थे | रही-सही कसर वृद्धाश्रम में एक्सपाइरी दवाइयों का जखीरा मिलने से पूरी हो गई. समाज कल्याण विभाग द्वारा एनजीओ के माध्यम से संचालित वृद्धाश्रम की हालत देख आश्चर्यचकित तहसीलदार गुरुदत्त पंचभावे ने तत्काल कमरों का ताला खुलवाया, जिससे बुजुर्ग कमरों में रह सके. वहीं अन्य अव्यवस्था को देख वृद्धाश्रम संचालक को तत्काल स्थिति में सुधार करते हुए बुजुर्गों की देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया.

एक स्टाफ के भरोसे वृद्धाआश्रम – क्या कोई यकीन कर पाएगा कि जिस वृद्धाश्रम को चलाने के लिए 12 स्टाफ की जरूरत है, वहां केवल एक स्टाफ से काम चलाया जा रहा है. तनख्वाह नहीं मिलने से कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं.