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विश्व वन्यजीव दिवस पर विशेष:तैमोर पिंगला व गुरुघासीदास पार्क में 5 हजार वन्यजीव

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नेशनल पार्क एवं टाइगर रिजर्व के बनने से वन्यजीवों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, एक ओर टाइगर के लिए अनुकूल माहौल मिलने से लगातार उनके मूवमेंट को जिले के जनकपुर, सोनहत में देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर जंगल में चीतल, गौर और बाइसन भी छोड़े जा रहे है।

बीते दो दशक से वन्यजीवों को अनुकूल माहौल मिलने से उनकी मौत के आंकड़ों मे कमी आई है। हालांकि मानव और वन्यजीवों के बीच द्वंद की भी घटनाएं सामने समय-समय पर आती रहती है। जंगल में वन्यजीवों को सबसे ज्यादा खतरा राजसाही के दौरान हुआ करता था, जब राजा शौक के तौर पर वन्यजीवों का शिकार करते थे और जानवरों को मारकर उनके खाल में भूसा भरकर दीवारों पर शो के लिए लगाया करते थे, उसे वे अपनी शान मानते थे।

भारत के आखिरी चीते का शिकार के कोरिया के राजा ने 1948 में किया था। कोरिया रियासत में घना जंगल होने की वजह से यहां बाघ, तेंदुएं, चीते जैसे खूंखार जानवर बड़ी संख्या में थे। राजा कई बार शौक के लिए, तो कभी वीरता दिखाने इन जानवरों का शिकार करते थे।

यहीं नही कई बार ग्रामीणों की गुहार के बाद उनकी सुरक्षा के लिए भी बाघ, तेंदुआ समेत अन्य खूंखार जानवरों का शिकार करते थे। सरगुजा महाराजा ने 1170 बाघों का शिकार किया था और आज कोरिया जिले के गुरु घासीदास नेशनल पार्क समेत सरगुजा के तैमौर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर बनाए जा रहे 2049 वर्ग किमी के टाइगर रिजर्व में पांच बाघों का मूवमेंट ही देखा जा रहा है।

लोगों ने एक बाघ को मारा

6 महीने पहले सोनहत में एक बाघ ने भैंस का शिकार किया था लेकिन ग्रामीणों ने दहशत से बचने शिकार के शव पर जहर डाल दिया, जिससे दोबारा भोजन करने पहुंचे बाघ की मौत हो गई थी। दरअसल एक बार बड़ा शिकार करने के बाद बाघ उसे दो से तीन बार खाने आता है और इसी बात का फायदा उठाकर ग्रामीणों ने मरे हुए भैंस में जहर मिला दिया था।

200 कैमरों से निगरानी
गुरुघासी दास नेशनल पार्क के डायरेक्टर रामा स्वामी वाई ने बताया पार्क क्षेत्र और टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक वर्ग किमी के दायर में एक अनुमान के मुताबिक 4 वन्यजीव पाए जाते है। क्योंकि जंगल में वन्यजीवों की जनगणना संभव नही है। टाइगर रिजर्व में 200 कैमरे बाघ, तेंदुआ समेत अन्य जंगली जानवरों के मूवमेंट का ट्रेस करने के लिए लगाए गए है।

पार्क व टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 8,196 से अधिक वन्यप्राणी

जंगल में एक अनुमान के मुताबिक एक वर्ग किमी के दायरे में चार या उससे अधिक वन्यजीवों के पाए जाने की संभावना होती है। इस लिहाज से पार्क क्षेत्र में 8 हजार 196 वन्यप्राणियों के होने की संभावना है, वर्तमान में पार्क क्षेत्र पांच बाघ के अलावा 40 से अधिक तेंदुआ है, गौर, चिंकारा, नील गाय, जंगली सुअर, संभार, जंगली बिल्ली, खरगोश, भेड़िया, उदबिलाव समेत भालू, साहिल के अलावा कई प्रकार वन्यजीव है। नेशनल पार्क क्षेत्र में 35 राजस्व गांव में चेरवा, पंडो, गोंड़, खैरवार समेत अगरिया जनजातियां के लोग जंगल में इन वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र में रहते है।