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मार्च 2023 से प्रोडक्शन:राज्य में एथेनाल बनाने का पहला प्लांट कवर्धा मे बनकर तैयार अगले माह से 17 हजार टन मोलासिस से बनेगा 51 लाख लीटर

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छग राज्य का पहला एथेनॉल प्लांट कवर्धा में बनकर लगभग तैयार हो चुका है। उम्मीद है कि इसी साल मार्च में प्लांट से एथेनॉल बनना शुरू हो जाएगा। भोरमदेव कारखाने में गन्ने से शक्कर बनने के बाद शेष तरल पदार्थ मोलासिस को एथेनॉल प्लांट के टैंकों में स्टोर करना शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि बी-हैवी मोलासिस से प्लांट में एथेनॉल बनेगा। जानकारों के मुताबिक 1 टन बी- हैवी मोलासिस से 300 लीटर तक एथेनॉल बनाया जा सकता है। सीजन में भोरमदेव कारखाने में गन्ना पेराई के बाद करीब 17 हजार टन मोलासिस उत्पादन होता है।

जबकि प्लांट की आवश्यकता इससे ज्यादा की है। कारखाने में जितना मोलासिस उत्पादन होगा, उससे प्लांट का काम सिर्फ 3 महीने तक ही चल सकता है। क्योंकि एथेनॉल प्लांट की क्षमता रोजाना 80 किलोलीटर उत्पादन की है। इस लिहाज से पूरे सीजन में कारखाने से 17 हजार टन मोलासिस मिलेगा, जिससे 51 हजार किलोलीटर (51 लाख लीटर) एथेनॉल बनाया जा सकता है। प्लांट को चलाने के लिए शेष रॉ-मटेरियल की आपूर्ति बिशेसरा स्थित नए शक्कर कारखाने से की जाएगी।

रोज 80 हजार लीटर एथेनॉल बनाने की क्षमता है प्लांट में
शक्कर कारखाना के पीछे नवनिर्मित इस प्लांट की क्षमता रोज 80 हजार लीटर एथेनॉल बनाने की है। एथेनॉल प्लांट के लिए शक्कर कारखाने से मोलासिस पाइप लाइन से सप्लाई की जा रही है, जिसे प्लांट के टैंकों में स्टोर किया जा रहा है। मोलासिस को आवश्यकता अनुसार सड़ाकर और शेष प्रोसेस से गुजारने के बाद 99.8 प्रतिशत प्योर एथेनॉल मिलेगा। बचे हुए वेस्ट लिक्विड से बायोगैस और स्प्रिट भी बन सकेगा। इस साल अभी तक शक्कर कारखाने में 13900 टन मोलासिस तैयार हो चुका है। यह पूरा ही एथेनॉल प्लांट को दिया जाएगा।

दो श्रेणी के मोलासिस का उत्पादन
शक्कर कारखाने से दो श्रेणी के मोलासिस का उत्पादन होता है। दोनों से एथेनॉल बन सकता है, लेकिन प्रति टन मोलासिस से एथेनॉल उत्पादन में अंतर है। कारखाने के केमिस्ट बीएस पोटपोज का कहना है कि एक टन बी-हैवी मोलासिस से जहां 300 लीटर एथेनाल बनता है। वहीं एक टन सी- हैवी मोलासिस से 250 लीटर एथेनॉल बना सकते हैं। प्रति टन 50 लीटर का अंतर है।