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अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे टियर-2 और टियर-3 शहर, प्रदेश में उद्योग बड़ी ताकत, कमाई में रायपुर आगे

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देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में हमारे छोटे-मंझौले टियर-2 और टियर-3 शहर भी आर्थिक महानगर बनने की ओर बढ़ रहे हैं। दुनिया के मशहूर इकोनॉमिस्ट लार्ड मेघनाद देसाई का कहना है कि भारत का भविष्य सर्विस इकॉनमी में है जो टियर 2-3 शहरों में धड़क रही हैं, पनप रही हैं। स्टेट को ऑटोनॉमी देकर उन्हें वित्तीय और संसाधनों के स्तर पर सशक्त करना जरूरी है। देश की जीडीपी में छत्तीसगढ़ का योगदान 4.61 लाख करोड़ रुपए है। इसमें रायपुर, भिलाई-दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा जैसे शहरों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

इन शहरों की आर्थिक ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रायपुर में प्रति व्यक्ति आय में पिछले साल की तुलना में 11.5% की बढ़ोतरी हुई है। भारत की जीडीपी विकास दर 9.2% थी, छत्तीसगढ़ की 11.5% रही। छत्तीसगढ़ के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सुविधाएं व संसाधन कम लागत पर उपलब्ध हैं। रायपुर शहर की आबादी ही 2031 में 18 लाख से बढ़कर 31 लाख हो जाएगी। 2020-21 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद में उद्योग क्षेत्र की भागीदारी 50.61% रही, जबकि कृषि क्षेत्र की भागीदारी केवल 16.73% है।

रायपुर की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उद्योग और व्यापार है। राज्य की जीडीपी में केवल रायपुर से ही 2 लाख करोड़ से ज्यादा का योगदान है। स्पंज आयरन की 100 से ज्यादा, मिनी स्टील प्लांट करीब 119 और 80 से ज्यादा रोलिंग मिल हैं। यही वजह है कि उद्योगों से ज्यादा टैक्स मिलता है।

दुर्ग शहर कमाई के लिहाज से आज छत्तीसगढ़ का दूसरा प्रमुख शहर है। भिलाई स्टील प्लांट यहां के लोगों की आमदनी और रोजगार का प्रमुख जरिया है। कोरोना के दौर में भी यहां के स्टील प्लांट से लगातार उत्पादन होता रहा। प्रति व्यक्ति आमदनी में औसत रूप से लगभग 12 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ है। पिछले साल प्रति व्यक्ति आय एक लाख 5 हजार 778 रुपए थी। अनुमान है कि अब प्रति व्यक्ति सालाना आय लगभग एक लाख 18 हजार 401 रुपए है।

बिलासपुर शहर कमाई के लिहाज से छत्तीसगढ़ का तीसरा प्रमुख शहर है। एसईसीएल, बाल्को आदि औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कारण इस शहर की टैक्स भागीदारी बड़ी है। इसके अलावा हथकरघा उद्योग भी शहर को आर्थिक मजबूती प्रदान करता है।

कोरबा राज्य के माइनिंग जिलों में शामिल हैं। जिले की रिवेन्यू में कोयला प्रमुख तत्व है। यहां काेयले का सालाना उत्पादन 1 लाख 18 हजार 897 टन है। इसका मूल्य लगभग 17156 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा चूना पत्थर, फर्शी पत्थर, मुरुम, रेत के उत्खनन से भी जिले की कमाई का बड़ा स्रोत है।

  • 4.61 लाख करोड़ है छत्तीसगढ़ का सकल घरेलू उत्पाद
  • 4 था स्थान देश में वास्तविक पूंजी निवेश के नजरिए से
  • 812 करोड़ रुपए का निवेश 2 साल में करके काम शुरू किया।

छत्तीसगढ़ की ताकत… 4 साल में 93 हजार करोड़ निवेश, सवा लाख को रोजगार

पिछले चार साल में छत्तीसगढ़ में 194 से ज्यादा एमओयू हुए हैं। इनमें से 185 एमओयू पर काम शुरू हो चुका है। इसमें लगभग 93 हजार 467 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है। इससे 1 लाख 13 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलेगा। राज्य में 185 एमओयू में से 19 में उत्पादन शुरू हो गया है। इनमें फूड, स्टील, इलेक्ट्रिक व्हिकल, टेक्सटाइल डिफेंस, लघु वनोपज एवं फार्मास्युटिकल से संबंधित इकाइयां शामिल हैं। वर्तमान में 33 यूनिटों का काम चल रहा है। 87 उद्योग स्थापित करने काम प्रारंभ हो गया है। जिन 185 एमओयू पर काम चल रहा है उनमें करीब 4941 करोड़ 21 लाख रुपए का पूंजी निवेश किया गया है। इनमें अब तक 3661 लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। 106 इकाइयों ने जमीन खरीद कर अनुबंध किया है। 41 इकाइयों को जमीन अलाट की गई है। 45 यूनिटों ने लैंड डायवर्जन करा लिया है। ये इकाइयां सरगुजा से लेकर बस्तर के सुदूर तक लगाई जा रही हैं। प्रदेश की औद्योगिक नीति 2019-2014 में राज्य में वृहद, मेगा एवं अल्ट्रा मेगा उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज है। इसमें टेक्सटाइल, प्लास्टिक, फार्मास्युटिकल, जूट, स्टील, इलेक्ट्रानिक्स के उद्योगों को केबिनेट ने अनुदान देने का अनुमोदन भी कर दिया है।

तीसरी बड़ी इकोनॉमी की ओर
देश में सिर्फ 3% जमीन पर बसे शहरों का देश की जीडीपी में 60% योगदान

  • टियर-2, टियर-3 शहरों में कई देश बाजार ढूंढ़ रहे हैं, क्योंकि ये शहर उत्पादक हैं, कम लागत पर यहां श्रम-संसाधन उपलब्ध हैं। कौशल है, कंज्यूमर हैं।
  • ऑनलाइन खरीदारी में 50% लोग टियर-2 व 3 से हैं।
  • यूनाइटेड नेशंस डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स का अनुमान है- शहरी जनसंख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी भारत में होगी और यह 2025 तक दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा।

सोर्स- नीति आयोग और एशियन डवलपमेंट बैंक की मई 2022 की रिपोर्ट,बीसीजी की रिपोर्ट।

सिटी की जीडीपी को केन्द्र में रखकर नाइट इकोनॉमी पर काम की जरूरत “टियर-1 शहरों में जगह, संसाधन और सुविधाएं चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं इसलिए देश-राज्य से पहले सिटी की जीडीपी पर काम करना होगा। नाइट इकोनॉमी को विकसित करना चाहिए। जैसे इंदौर का सराफा ज्वैलरी का बाजार है लेकिन रात को वो स्ट्रीट फूड मार्केट बन जाता है। शिफ्ट में उद्योगों, सेवाओं को चलाने की वर्किंग होनी चाहिए, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भार ना पड़े और संसाधन का अधिकतम उपयोग भी करें।” -प्रो. हिमांशु रॉय, डायरेक्टर, आईआईएम इंदौर