सभी पब्लिकली फंडेड संस्थानों की लाइब्रेरी को भी तर्कसंगत सिक्युरीटी प्रोटोकॉल का ध्यान में रखते हुए आम जनता के लिए ऐक्सेसिबिल बना दिया जाएगा. इसके अलावा इस पॉलिसी के तहत साइंस एंड टेक्नॉलजी के क्षेत्र में भारत को आत्म निर्भर बनाने की योजना है.
साइंटिफिक नॉलेज और डेटा को सबके लिए उपलब्ध करवाने के लिए सरकार ने एक ओपन डेटा पॉलिसी बनाई है, जो कि सार्वजनिक क्षेत्र की फंडिंग द्वारा किए गए रिसर्च और उसके द्वारा उपलब्ध रिजल्ट को सभी को फ्री में उपलब्ध कराएगा. इसके अलावा सरकार ने पूरे विश्व में साइंटिफिक जर्नल का भारी मात्रा में सब्स्क्रिप्शन लेने का भी प्रस्ताव रखा है ताकि भारत में इसे लोगों को इसे फ्री में उपलब्ध कराया जा सके.
साइंटिफिक जर्नल के लिए ‘वन नेशन वन सब्स्क्रिप्शन’ पॉलिसी काफी क्रातिकारी कदम है जो कि साइंस के क्षेत्र में रिसर्च करने वालों के लिए काफी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है. दुनिया में कुल 3 हजार से 4 हजार अति-प्रभावशाली साइंटिफिक जर्नल हैं
जिनके बल्क सब्सक्रिप्शन के लिए सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करना पड़ेगा. लेकिन साइंस के फील्ड में रिसर्च करने वालों पर इसका भारी प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, इन साइंटिफिक जर्नल की कीमत काफी ज्यादा है जिसकी वजह से कई बड़े संस्थान भी इसका सब्स्क्रिप्शन भी मुश्किल से खरीदते हैं.
विज्ञान और तकनीक मंत्रालय ने नई पॉलिसी को बनाया है जिसमें नए साइंस टेक्नॉलजी और इनोवेशन ऑब्जर्वेटरी को सेटअप करने का प्रस्ताव है. ये भारत में जेनरेट होने वाले सभी प्रकार के डेटा के लिए सेंट्रल रिपॉज़िटरी की तरह काम करेगा. इस तरह के सारे डेटा को सभी लोगों के लिए फ्री बनाने का प्रस्ताव है. हालांकि, जहां पर निजता, राष्ट्रीय सुरक्षा या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट के कारण आम जनता को डेटा नहीं दिया जा सकेगा वहां भी रिसर्च करने वाले उचित लोगों को इसका ऐक्सेस दिया जाएगा.
इसके अतिरिक्त सभी पब्लिकली फंडेड संस्थानों की लाइब्रेरी को भी तर्कसंगत सिक्युरीटी प्रोटोकॉल का ध्यान में रखते हुए आम जनता के लिए ऐक्सेसिबिल बना दिया जाएगा. इसके अलावा पॉलिसी साइंस एंड टेक्नॉलजी के क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत की वकालत करता है. इसके तहत भारतीय तकनीक और तकनीक के भारतीयकरण पर जोर दिया जाएगा.



