ये संस्था तकनीक (Technique) का इस्तेमाल करके छोटे लोन लोगों को दे रही है. इसके लिए गैर-वित्तीय कंपनियों (Non-financial companies) और फिनटेक कंपनियों ने सॉफ्टवेयर तैयार कराया है. जिसकी मदद से एनालिटिक्स (Analytics) आधार पर छोटे वैल्यू के लोन बांट रही है.
कोरोना महामारी के बाद देश का युवा वर्ग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटी रकम लोन के रूप में ले रहा है. मार्च 2020 के बाद से अब तक इस तरह के लोन में 50 फीसदी की ग्रोथ देखी गइ है. आपको बता दें देश में स्मॉल पर्सनल लोन सबसे ज्यादा गैर-वित्तीय कंपनियों और फिनटेक कंपनियों के द्वारा दिया गया है. सीआरआईएफ की रिपोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार यदि पिछले दो साल के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो 50 हजार रुपये से कम के लोन की मांग में 5 गुना बढ़ोत्तरी हुई है.
गैर-वित्तीय कंपनियां ऐसे दे रही है लोन- ये संस्था तकनीक का इस्तेमाल करके छोटे लोन लोगों को दे रही है. इसके लिए गैर-वित्तीय कंपनियों और फिनटेक कंपनियों ने सॉफ्टवेयर तैयार कराया है. जिसकी मदद से एनालिटिक्स आधार पर छोटे वैल्यू के लोन बांट रही है.
युवा वर्ग ले रहा है जमकर लोन- सीआरआईएफ की रिपोर्ट के अनुसार 18 से 30 साल के लोगों ने सबसे ज्यादा लोन लिया है. यदि कुल स्मॉल लोन की बात की जाए. तो उसमें से 41 प्रतिशत पर्सनल लोन युवाओं के द्वारा लिया गया है. वहीं वार्षिक आय के हिसाब से आंकड़ों को देखा जाए तो 3 लाख रुपये सालाना कमाने वाले लोगों में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
गैर-वित्तीय कंपनियां की हिस्सेदारी बढ़ी- कोरोना महामारी के बाद से गैर-वित्तीय कंपनियों ने सबसे ज्यादा लोन बांटा है. आपको बता दें वित्त वर्ष 2018 में जहां गैर वित्तीय कंपनियों ने 23 प्रतिशत पर्सनल लोन बांटा था. वहीं वित्त वर्ष 2020 में ये आंकड़ा बढ़कर 43 प्रतिशत पर पहुंच गया है. वहीं, सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी इस दौरान 40 फीसदी से घटकर 24 फीसदी रह गई है.
आसान शर्तों पर लोन से बढ़ी हिस्सेदारी- अपनी लोन प्रक्रिया में चुस्ती और फुर्ती के चलते ये फिनटेक कंपनियां बड़े बैंकों के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं. बैंकों में प्रमाणों और दस्तावेजों की काफी ज्यादा जरूरत पड़ती है. जबकि फिनटेक कंपनियां डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए ग्राहकों की योग्यता निर्धारित करती हैं. फिनटेक कर्जदाताओं में मुख्यतः: स्टार्टअप शामिल हैं. इन्होंने 65 फीसदी कर्ज 30 साल से कम उम्र के ग्राहकों को दिए हैं. इसके चलते फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है.



