अमेरिकी प्रतिबंधों और कोरोना महामारी ने ईरान की हालत बेहद ख़राब कर दी है. ईरान की मुद्रा की हालत इतनी ख़राब है कि एक डॉलर के बदले अब 272,500 ईरानी रियाल मिल रहा है. उधर ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को फिर से बहाल करने की मांग को खारिज कर दिया है
बता दें कि रविवार को ईरान की मुद्रा रियाल अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. ईरान में एक डॉलर के बदले अब 2,72,500 रियाल मिल रहा है. ईरान में जून से अब तक डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर है कि तेहरान अपना तेल वैश्विक बाजार में बेच नहीं पा रहा है. भारतीय मुद्रा के मुताबिक रविवार को ईरानी रियल की कीमत 17 पैसे से भी कम थी.
इससे पहले वर्ष 2015 में ईरानी मुद्रा डॉलर के मुकाबले गिरकर 32 हजार तक पहुंच गई थी. बता दें कि अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी के ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किए गए दावे से पश्चिम एशिया में खलबली मच गई है.
उधर अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि ईरान इस साल के आखिर तक परमाणु हथियार बना सकता है. ईरान से आ रहे इस खतरे को देखते हुए अमेरिका तेहरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने जा रहा है
बताया जा रहा है कि अमेरिका सोमवार को ईरान से जुड़े दो दर्जन लोगों और संगठनों के खिलाफ प्रतिबंध लगा सकता है. अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को जारी रखे हुए है
उन्होंने कहा कि ईरान के पास पर्याप्त मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ जिससे वह इस साल के आखिर तक परमाणु हथियार बना सकता है. उन्होंने यह कहा कि ईरान उत्तर कोरिया की मदद से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइलें बना रहा है. हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश किए.
ईरान से बढ़ रहे इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ईरान के दो दर्जन लोगों और संगठनों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने जा रहा है. इन लोगों पर ईरान के मिसाइल, परमाणु हथियार और अन्य परंपरागत हथियार कार्यक्रमों में शामिल होने का आरोप है. 8/ 8
अमेरिका यह नए प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाने जा रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करना चाहते हैं. यही नहीं उन्होंने यूएई और बहरीन के साथ इजरायल की दोस्ती कराई है. यूएई-बहरीन और इजरायल की दोस्ती से ईरान के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बन गया है. ट्रंप को उम्मीद है कि इस मोर्चे से इजरायल समर्थक वोट उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में मिल सकते हैं.



