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BS4 वाहनों के रजिस्ट्रेशन का मामला- सरकार को वाहन रजिस्ट्रेशन डिटेल देने के लिए मिला अतिरिक्त समय

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार (Government of India) को वाहनों के रजिस्ट्रेशन के विवरण के साथ हलफनामा दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है. FADA (Federation of Automobile Dealers Associations) की तरफ से पेश वकील केके विश्वनाथन ने कहा कि हम डीलर हैं. हमारे पास बिना बिके वाहन हैं. हमें वाहनों को निर्माताओं के पास वाहनों को वापस ले जाने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि उन्हें दूसरे देशों में निर्यात किया जा सके. अफ्रीका में कुछ देश हैं जो बीएस 4 वाहनों की अनुमति देते हैं. आपको बात दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई को बीएस-4 व्हीकल्स की बिक्री को लेकर 27 मार्च को दिया गया अपना आदेश वापस ले लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिन के लिए दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के शेष हिस्सों में बीएस-4 वाहनों की बिक्री हो सकेगी. लेकिन बिक्री बचे हुए स्टॉक के केवल 10 फीसदी तक ही सीमित रहनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पीछे कारण था कि बीएस4 व्हीकल्स की बिक्री को 31 मार्च 2020 तक अनुमति थी लेकिन मार्च पूरा होने के 6 दिन पहले 25 मार्च से कोविड19 लॉकडाउन लागू होने से बिक्री नहीं हो सकती थी.

अब क्या हुआ-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम वाहनों को वापस लेने के लिए हम आदेश क्यों पारित करें कार निर्माताओं को समय सीमा के बारे में पता था. उन्हें वाहन लेने चाहिए. अब 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनावाई होगी.

क्या है मामला- सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-4 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन के लिए 31 मार्च 2020 की डेडलाइन तय की थी. इसी के बीच में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू था, जबकि 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू हो गया. इधर डीलरों के पास बड़ी संख्या में BS-4 टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर गाड़ियां बिक्री के लिए बची थीं. इसलिए डीलर बीएस-4 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने डीलरों को 10 फीसदी बीएस-4 वाहनों को बेचने की परमिशन दी थी.