Home देश प्रशासन सख्त: कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर जेल, जानिए इसके गंभीर नुकसान

प्रशासन सख्त: कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर जेल, जानिए इसके गंभीर नुकसान

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खेतों से आवारा पशुओं और पक्षियों को भगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ‘कार्बाइड गन’ (देसी पॉप गन) अब किसानों और आम जनता के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। फसलों की सुरक्षा के नाम पर धड़ल्ले से हो रहा इसका इस्तेमाल न सिर्फ जानलेवा हादसों को दावत दे रहा है, बल्कि पर्यावरण में गंभीर वायु प्रदूषण भी फैला रहा है। बढ़ते खतरों को देखते हुए प्रशासन ने इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

हवा में घुल रहा है आर्सेनिक का जहर, फेफड़ों को नुकसान

कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, कार्बाइड गन में इस्तेमाल होने वाला कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आते ही अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलीन गैस बनाता है। इसके तेज ब्लास्ट से हवा में भारी मात्रा में जहरीला धुआं और हानिकारक बारीक कण (पार्टिकुलेट मैटर) घुल रहे हैं। बाजार में मिलने वाले इस केमिकल में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे खतरनाक तत्वों के अवशेष होते हैं, जो सीधे सांस के जरिए इंसानी फेफड़ों में पहुंचकर ‘पल्मोनरी एडीमा’ (फेफड़ों में सूजन) और सांस फूलने जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं।

हाथ-चेहरे झुलसने और अंधेपन की बढ़ी घटनाएं

अस्पतालों से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार, इस देसी जुगाड़ वाली गन के फटने से कई किसान गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। लोकल पीवीसी या घटिया लोहे के पाइप से बनने के कारण यह गन ब्लास्ट के दबाव को झेल नहीं पाती और फट जाती है। इससे कई लोगों की उंगलियां कट चुकी हैं, चेहरे झुलस गए हैं और चिंगारी आंखों में जाने से हमेशा के लिए रोशनी तक जा चुकी है। इसके अलावा, इसकी चिंगारी से खेतों में खड़ी सूखी फसलों और पराल में भयानक आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

प्रशासन की चेतावनी: होगी सख्त जेल और भारी जुर्माना

कानूनी तौर पर ऐसी अवैध गन या पटाखों का निर्माण और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस गन का निर्माण, बिक्री या खेतों में इस्तेमाल करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ अवैध हथियार रखने और जनहानि का खतरा पैदा करने की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके लिए भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है।

पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा, ध्वनि प्रदूषण से लोग परेशान

इस गन से निकलने वाला तेज धमाका न सिर्फ इंसानों के कान के पर्दे फाड़ रहा है, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। तेज आवाज के डर से कई पक्षियों के दिल का दौरा पड़ने से मौत हो चुकी है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे इस खतरनाक तरीके को छोड़कर सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग (कंटीले पौधे) या आधुनिक अल्ट्रासोनिक साउंड मशीनों जैसे सुरक्षित और कानूनी विकल्पों को अपनाएं।