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भारत रूस से तेल खरीदे तो प्रतिबंध, अमेरिका खरीदे तो छूट क्यों? इस सवाल पर रूबियो ने दी सफाई

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रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका भारत जैसे देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, लेकिन खुद रूस से डील करता है. जब यही सवाल अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से पूछा गया तो वे सफाई देते नजर आए. उन्होंने प्रतिबंधों के असर, यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी हितों के बीच संतुलन बनाने की दलील दी.
अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाता है. लेकिन अब अमेरिका खुद रूस से डीजल खरीद रहा है, संभवतः मध्यावधि चुनावों से पहले पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम रखने के लिए. आप इस बदलाव और रणनीति में आए इस मोड़ को कैसे देखते हैं? इस पूरी स्थिति को कैसे समझाएंगे?
इस पर मार्को रूबियो ने कहा, मैं यह नहीं कह रहा कि यूक्रेन में चल रहा युद्ध महत्वपूर्ण नहीं है. यह महत्वपूर्ण है. यह युद्ध अब अपने पांचवें साल में पहुंच चुका है और स्थिति बेहद मुश्किल है. लेकिन जो लोग हम पर दबाव बनाते हैं, वे भी दुनिया के दूसरे हिस्सों में हमसे यही पूछते हैं कि हम रूस पर और ज्यादा प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रहे हैं. लोग यह नहीं समझते कि प्रतिबंध लगाने की भी एक कीमत चुकानी पड़ती है. प्रतिबंध सिर्फ रूस पर नहीं लगते, बल्कि उन सभी देशों पर भी असर डालते हैं, जो रूस के साथ कारोबार करते हैं. इसलिए यहां संतुलन बनाना जरूरी होता है.
दूसरे देशों को नुकसान भी तो हो रहा
मार्को रूब‍ियो ने कहा, एक तरफ हम इस युद्ध में शामिल देशों पर दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि वे किसी समझौते पर पहुंचें. दूसरी तरफ हमें यह भी समझना होता है कि जब हम दबाव बनाते हैं, तो उसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. यही उन वजहों में से एक है, जिसके चलते राष्ट्रपति ने कांग्रेस में हाल ही में पारित विधेयक को लेकर नेशनल स‍िक्‍योर‍िटी के आधार पर छूट देने का फैसला किया. इस विधेयक में रूस के साथ कारोबार जारी रखने वाले कुछ देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध बढ़ाने की बात थी. इस फैसले को लेकर डेमोक्रेट्स और दूसरे लोगों ने आलोचना भी की. इसके बावजूद राष्ट्रपति ने इन उपायों को तत्काल लागू नहीं करने का फैसला किया. इसकी वजह यह है कि वह समझते हैं कि इन सभी बातों को समग्र रूप से देखना जरूरी है.
दुन‍िया पर असर हमें देखना होगा
मार्को रूब‍ियो ने समझाते हुए कहा, आपको अपने हितों के साथ-साथ यूक्रेन और रूस में जो कुछ हो रहा है, उसका दुनिया भर पर पड़ने वाला असर भी देखना होगा. उम्मीद है कि इस संतुलन और भारत के साथ होने वाले व्यापार समझौते के जरिए इन मुद्दों को सुलझाया जा सकेगा. मैं समझता हूं कि तनाव बना हुआ है और यह भी समझता हूं कि हमें इन परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा.