रायपुर के ऐतिहासिक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में शैल कला (रॉक आर्ट) पर अलग से गैलरी बनाई जाएगी। यह काम नई दिल्ली का इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र करेगा। यह परियोजना उस करार का हिस्सा है जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय संचालनालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के साथ किया है। इस करार के जरिए दोनों संस्थान मिलकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने और संरक्षित करने का काम करेंगे।
संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत की उपस्थिति में गुरुवार को संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय रायपुर व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली के बीच परस्पर समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर हुआ है। अधिकारियों ने बताया, इस समझौते में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की ओर से स्थानीय छात्रों, पर्यटकों, शोधार्थियों और जनमानस को उनकी पुरा-संस्कृति के वास्तविक पक्षों से परिचित कराने के लिए विश्व व भारत की शैल कला के साथ छत्तीसगढ़ की शैल कला पर महन्त घासीदास स्मारक संग्रहालय में अलग से दीर्घा स्थापित की जाएगी। साथ ही दोनों संस्थाओं की विभिन्न अकादमिक कार्यक्रमों-परियोजनाओं जैसे शोध प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों का संकलन, सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण तथा राज्य संरक्षित शैलाश्रयों के संरक्षण-परिरक्षण जैसे कार्यों में सहायता होगी। संस्कृति मंत्री ने कहा कि “छत्तीसगढ़ की धरोहरों और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में यह समझौता ज्ञापन महत्वपूर्ण है। इस मौके पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक विवेक आचार्य, उप संचालक डॉ. पी.सी. पारख, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, डॉ. राजीव मिंज और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली से शैलकला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकर पंत, सहायक प्राध्यापक डॉ. दिलीप संत और परियोजना सहायक जाकिर खान आदि मौजूद रहे।



