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ऊर्जा दक्षता भवन कोड अगले साल से:छत्तीसगढ़ में उन्हीं बड़े भवनों के नक्शे पास होंगे, जिनमें बिजली बचाने की प्लानिंग

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छत्तीसगढ़ में 10 हजार वर्गफीट से बड़े अस्पताल, स्कूल-कालेज, कांप्लेक्स, मॉल, धर्मशाला, मैरिज पैलेस, होटल और अतिथि गृह इत्यादि भवनों के निर्माण की मंजूरी तभी मिलेगी, जब भवन के नक्शे में बिजली बचाने का प्लान होगा। सूरज की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग, भवन की दीवारों के सामने धूप रोकने वाली दीवार हो, गर्मी के दिनों में एसी का कम से कम उपयोग करने की जरूरत महसूस हो और सर्दियों के दिनों में भवन के अंदर का वातावरण गर्म रखने या पानी को गर्म करने के लिए बिजली का उपयोग कम से कम करना पड़े।

भवन निर्माण अनुज्ञा लेने के दौरान ही निर्माण करने वाले को यह सारे प्राव‌धान करने होंगे। छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे भारत में लागू ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) अगले साल जनवरी तक प्रदेश में लागू हो जाएगा। यही नहीं, भवन का पूर्णता प्रमाण पत्र भी तभी जारी होगा, जब निर्मित भवन में इन सारी बातों का ध्यान रखा गया हो।

राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। ड्राफ्ट को अभिमत के लिए सभी विभागों को भेजा गया है। अभिमत मिलते ही उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर के अंत या अगले साल जनवरी तक नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। इसके जारी होते ही प्रदेश में 10 हजार वर्गफीट से ऊपर के किसी भी भवन के निर्माण की अनुमति तब तक नहीं मिलेगी।

जब, तक उसमें ऊर्जा बचाने के उपाय नहीं किए जाएंगे। भवन निर्माण अनुज्ञा ही जारी नहीं होगी। बिल्डिंग का पूर्णता प्रमाण-पत्र भी तभी जारी किया जाएगा, जब संबंधित विभाग इस बात से संतुष्ट हो जाएंगे कि भवन में ऊर्जा संरक्षण के उपाय ऊर्जा संरक्षण भवन कोड के तहत कर लिए हैं। प्रदेश में निर्मित होने वाले ऐसे भवन जिसका क्षेत्रफल 10 हजार वर्गफीट से अधिक हो और वहां बिजली की डिमांड 100 किलो वॉट या फिर अनुबंधित भार 120 किलो वॉट से अधिक हो।

ड्राफ्ट 2012 का, पर लागू नहीं
केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड का प्रकाशन किया। कारण यह कि बिजली की कुल खपत का 33 प्रतिशत भवनों में होता है। ब्यूरो आफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) ने 2007 में एनर्जी एफिशिएंसी बिल्डिंग कोड तैयार किया। 2017 में इसका संशोधन किया गया। बीईई के नियमों के तहत ही छत्तीसगढ़ में 2012 में छग एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड का ड्राफ्ट तैयार किया। 2017 में संशोधन और 2018 में फिर संशोधन किया गया। इसे अब तक लागू नहीं किया गया। सीजीईसीबीसी-2022 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और अगले एक-दो हफ्ते में इसका प्रकाशन हो जाएगा।

इन बातों का ध्यान रखना होगा

  • भवन एनवलप यानी दीवारों पर सीधे सूरज की रोशनी न पड़े।
  • भीतरी और बाहरी रोशनी का विशेष ध्यान, कम बिजली जले।
  • खिड़कियां हवा व रोशनी वाली, जिससे एसी का कम उपयोग।
  • फ्लाई एश ब्रिक, ऊर्जारोधी निर्माण सामग्री का अधिक उपयोग।
  • सोलर प्लांट व सोलर एनर्जी सिस्टम लगाया जाना अनिवार्य।
  • डे लाइट का अधिक उपयोग हो, भवन निर्माण इसी डिजाइन से।
  • सूरज की दिशा के अनुसार दरवाजे, खिड़कियां और डक्ट हो।

भवनों की अलग श्रेणियां, समिति भी बनाई जाएगी
ऊर्जा संरक्षण भवन कोड मुख्य तौर पर व्यावसायिक, अर्ध व्यावसायिक भवनों के अलावा, स्कूल, कालेज, अस्पताल, पर्यटन, शासकीय भवन, प्रशासनिक इमारतें, शापिंग मॉल्स इत्यादि में इस कोड को लागू करने का विशेष प्रावधान किया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए बिजली कंपनी, क्रेडा, नगरीय निकायों सहित कुछ विभागों की एक समिति भी बनाई जानी है। यह निगरानी भी लगेगी।

2017 में बना था कानून

भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने देशभर में बिजली के उपयोग को कम करने के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) 2017 लागू किया। इसके लागू होने के साथ ही देश के सभी राज्यों को अपने यहां इस कोड के तहत ही ऊर्जा बचत को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण की बाध्यता लागू करनी थी। देश के 18 राज्यों में यह लागू हो चुका है। पांच राज्यों में मसौदा कैबिनेट में मंजूरी के लिए गया है और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में मसौदा तैयार है और विभागों से अभिमत लेने सहित मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।

एक हफ्ते का समय लगेगा
“ऊर्जा संरक्षण भवन कोड का ड्राफ्ट सभी विभागों को अभिमत के लिए भेजा गया है। यह मिलते ही नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। इसमें एक से दो हफ्ते का वक्त लगेगा।”
-अंकित आनंद, -सचिव मुख्यमंत्री, ऊर्जा विभाग

बड़े भवनों में यह लागू होगा
“अब तक सिर्फ सरकारी भवनों में ही सीजीईसीबीसी के पालन की कोशिश की जा रही थी। लेकिन अब यह प्रदेश के सभी बड़े व्यावसायिक भवनों में भी यह लागू होगा।”
-आलोक कटियार, सीईओ क्रेडा