छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त फार्मेसी संस्थानों का निरीक्षण अब फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के मापदंडों की तर्ज पर होगा। बड़े शहरों में संस्थान के पास दो हजार वर्ग मीटर और जिला स्तर के कॉलेज के पास 800 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए। जमीन का उपयोग सिर्फ शिक्षा के मकसद से होगा। निरीक्षण के दौरान संस्थान की जमीन से लेकर फैकल्टी की जानकारी, लैब, हर साल किए जाने वाले खर्च का ब्यौरा सहित अन्य जानकारियों से संबंधित 15 पेजों का प्रोफार्मा भरना पड़ेगा।
किसी भी तरह की गलत सूचना देने या निरीक्षकों की ओर से गड़बड़ी पाए जाने पर आरयूएचएस कार्रवाई करेगा। फार्मेसी एजुकेशन रेग्युलेशन-2020 के नियमों की भी सख्ती से पालना करनी होगी। डिप्लोमा कॉलेज में सात फैकल्टी में से 3 के पास मास्टर डिग्री और चार के पास बैचलर डिग्री के साथ तीन साल का अनुभव होना अनिवार्य होगा। कॉलेजों में ड्रग इंफॉर्मेशन सेंटर और पेशेंट काउंसलिंग के लिए मॉडल फार्मेसी लैब होनी चाहिए। वेबसाइट पर संस्थान मे संचालित कोर्सेज, सीटों की संख्या को बताया होगा।
इन चार बिंदुओं से समझें… क्यों जरूरत
- प्रदेश के विभिन्न फार्मेसी संस्थानों में फैकल्टी, स्टाफ, लैब की कमी है। एक ही भवन में दो-दो संस्थान चल रहे हैं। एक ही फैकल्टी को दो जगह दिखाना और समय पर स्टाफ को वेतन नहीं मिलने के साथ ही कम वेतनमान की शिकायतों को दूर करने के लिए निरीक्षण में बदलाव किया गया है।
- छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल को भी पैनल में शामिल करना प्रस्तावित है। मान्यता और खामियों का पता चलने पर फार्मासिस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन करना आसान हो सकेगा। काउंसिल में पंजीकृत फार्मासिस्ट की कुल संख्या 24 हजार के पार हो चुकी है।
- साल 2014 में देश में डिप्लोमा इन फार्मेसी के संस्थानों की संख्या 710 से बढ़कर 3333 और बैचलर इन फार्मेसी के कॉलेजों की संख्या 930 से बढ़कर 2411 हो चुकी है। संंख्या तो बढ़ी पर गुणपत्ता पर प्रश्न उठ रहे हैं ।
- नए पाठ्यक्रम शुरू करने और नियमों में संशोधन करने के लिए सीएसवीटीयू के अधिनियम में बदलाव किया जा रहा है।
निरीक्षण में कुछ नए बिंदु जोड़े गए , इससे सुधार होगा
“स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन देने के साथ ही संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए निरीक्षकों की ओर से किए जाने वाले निरीक्षण में कुछ नए बिंदु जोड़े गए हैं। इसका पालना करना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य फार्मेसी की पढ़ाई में गुणवत्ता को बढ़ाना है। इसके लिए मापदंड तय किए गए हैं। इससे ज्यादा फायदा स्टूडेंट्स को होगा। कॉलेज भी अपग्रेड होते जाएंगे। इसका लाभ मिलेगा।”
– डॉ. एमके वर्मा, कुलपति, सीएसवीटीयू



