आरक्षण की वजह से करीब दो महीने से अटकी काउंसिलिंग एक बार फिर शुरू होगी। फार्मेसी, एग्रीकल्चर और बीएड-डीएलएड समेत कई प्रोफेशनल कोर्स की करीब 20 हजार सीटों पर छात्र अब एडमिशन ले सकेंगे। हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद इन कोर्स में प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है। पहले फार्मेसी और फिर एग्रीकल्चर व बीएड में एडमिशन शुरू करने का आदेश दिया गया है। फार्मेसी कॉलेजों में दाखिले की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। इसलिए समय पर फैसला आने के बाद हजारों छात्रों ने राहत की सांस ली है।
तकनीकी शिक्षा संचालनालय जल्द ही प्रवेश से संबंधित सूचना जारी करेगा। राज्य में बी-फार्मेसी व डी-फार्मेसी की करीब छह हजार सीटें हैं। इनकी प्रवेश परीक्षा में इस बार 22 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। इस सत्र के लिए फार्मेसी की अभी एक बार भी काउंसिलिंग नहीं हुई है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय से इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्नीक, एमसीए जैसे कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया सितंबर में शुरू हुई थी। तब फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता से संबंधित प्रक्रिया चल रही थी। इस वजह से काउंसिलिंग नहीं हुई।
आखिरी तारीख के पहले काउंसिलिंग होगी पूरी
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के गाइडलाइन के अनुसार फार्मेसी में रजिस्ट्रेशन कराने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। इसलिए छात्र परेशान थे। लेकिन अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद सभी ने राहत की सांस ली है। इसी तरह इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में भी बीएससी एग्रीकल्चर व हार्टीकल्चर कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। यहां बीएससी एग्रीकल्चर व हार्टीकल्चर की 2600 सीटें हैं। करीब 2 हजार सीटों में दाखिले भी हो गए हैं। करीब 600 सीटें अभी भी खाली हैं। खाली सीटों में प्रवेश के लिए आवेदन भी मंगाए गए थे। बड़ी संख्या में छात्रों के आवेदन मिले थे। लेकिन आरक्षण की वजह से इस पर रोक लगा दी गई। अब इन सीटों पर भी प्रवेश होगा।
बीएड और डीएलएड की सात हजार से ज्यादा सीटें खाली
राज्य में बीएड-डीएलएड की सात हजार से ज्यादा सीटें अभी भी खाली हैं। बीएड की 14400 सीटें हैं। इसकी प्रवेश परीक्षा में इस बार 1 लाख 22 हजार छात्र शामिल हुए थे। अगस्त में काउंसिलिंग शुरू हुई। दो चरण की काउंसिलिंग के बाद 3734 सीटें खाली हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य के संस्थानों में डीएलएड की 6710 सीटें हैं। इनमें 3302 सीटों में एडमिशन हुए और 3408 सीटें खाली हैं। इन कोर्स में प्रवेश के लिए हाईकोर्ट ने आदेश दे दिया है।
काउंसिलिंग में देरी की वजह से साल बर्बाद होने का डर भी राज्य के प्रोफेशनल कोर्स में 20 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। आरक्षण विवाद की वजह से दाखिले की प्रक्रिया रूकी हुई थी। प्रवेश में देरी होने से छात्रों को साल बर्बाद होने का भी डर सता रहा था। प्रवेश का इंतजार कर रहे छात्र बार-बार सवाल कर रहे थे कि एडमिशन के मामले में देरी क्यों की जा रही है। यह नौकरी नहीं है, जिसके लिए पोस्ट बाद में निकाली जाए। छात्रों के लगातार दबाव के बाद ही मामला फिर से हाई कोर्ट तक पहुंचा।



