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राजधानी के सबसे ज्यादा प्रदूषित रहने वाले टाटीबंध और सरोरा इलाके की हवा हुई साफ

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औद्योगिक इलाका होने के कारण राजधानी के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शुमार टाटीबंध और सरोरा की हवा अब पहले से साफ हो गई है। छह साल पहले यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 के करीब पहुंच चुका था। ये अभी घटकर 50 से 85 के बीच पहुंच गया है। हवा में एयर क्वालिटी इंडेक्स की मात्रा को तीन तरह से जांचा जाता है। चेक किया जाता है कि हवा में धूल के बारीक और बड़े कण के साथ जहरीली गैस की मात्रा कितनी है। इंडेक्स के निर्धारित मापदंडों के अनुसार ये क्वालिटी इंडेक्स 50 तक सबसे बेहतर और 100 से नीचे तक बेहतर माना जाता है।

अक्टूबर के महीने की जांच में टाटीबंध और सरोरा की हवा छह साल की तुलना में अब बेहतर स्थिति में है। हवा में न तो ज्यादा धूल के कण हैं और न ही जहरीली हवा। शहर के अन्य पांच-छह जगहों पर हो रही जांच में सभी स्थानों की रिपोर्ट अब संतोषजनक मिल रही है। ये आंकड़े इसलिए भी संतोषजनक है, अक्टूबर में सर्दी की दस्तक के साथ प्रदूषण बढ़ जाता है। ऐसे समय में हवा में धूल व गैस कम मिलना विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी रिपोर्ट है।

राजधानी सहित प्रदेश में हवा, पानी इत्यादि प्राकृतिक तत्वों के प्रदूषण का स्तर मापने और कारगर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार की एजेंसी छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियमित तौर पर प्रदूषण की जांच रहा है। पिछले कुछ सालों में मंडल की रिपोर्ट शहर के लिए संतोषजनक है। शहर के ज्यादातर जगहों पर प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है। करीब आधा दर्जन जगहों पर हर दिन, पूरे महीनेभर वायु प्रदूषण की जांच हो रही है। सभी जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 51 से 100 के बीच आ रहा है।

यह संतोषजनक स्थिति है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का यह स्तर चिंताजनक नहीं है। हालांकि प्रदूषण का लेवल 50 से नीचे होने पर स्थिति को आदर्श माना जाता है। ऐसी स्थिति शहर के व्यस्ततम और व्यावसायिक क्षेत्रों की नहीं हो सकती। शहर के जिन इलाकों में प्रदूषण की जांच की जा रही है, वे सभी काफी धूल-डस्ट और प्रदूषण वाले इलाके हैं। यहां वाहनों की आवाजाही काफी रहती है। विभिन्न तरह के निर्माण और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। इसके बावजूद यहां प्रदूषण का स्तर काफी कम आना अच्छे संकेत दे रहा है।

सख्ती से कम हुआ हवा का प्रदूषण
पिछले चार-पांच सालों में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। औद्योगिक इलाकों में बड़े पैमाने पर प्लांटेशन किया गया है। उद्योगों को चिमनियों में प्रदूषण रोकने वाले उपकरण लगाने के आदेश का सख्ती से पालन करवाया गया। इसका नतीजा है कि शहर में प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है। आरपी तिवारी, सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल

लंग्स व आंखों के लिए खतरा
धूल में जहरीली हवा और कण की मात्रा ज्यादा होने से सांस, दमा और लंग्स के साथ आंखों में इंफेक्शन का खतरा रहता है। लगातार ऐसे वातावरण के संपर्क में रहने से स्किन की समस्या भी पैदा हो जाती है।
डा. अब्बास नकवी, एमडी मेडिसिन