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रेलवे ने शासन को कब्जा हटाने पत्र लिखा-दोहरीकरण के काम में आ रही बाधा, झुग्गीवासियों के लिए हाउसिंग फॉर ऑल, लेकिन उनके पास दस्तावेज नहीं

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रायपुर से टिटलागढ़ रूट यानी वाल्टेयरलाइन के दोहरीकरण का प्रस्ताव करीब एक दशक पुराना है। रूट के दोहरीकरण में सबसे बड़ा रोड़ा पटरी के किनारे बस्तियां हैं। बस्तियों को हटाने रेलवे और निगम के बीच काफी सालों से विवाद चल रहा है। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अब एक बार फिर रेलवे ने शासन को पत्र लिखा है, ताकि दोहरीकरण के काम को आगे बढ़ाया जा सके।

अतिक्रमण के चलते आरबीएच से रायपुर रेलवे स्टेशन तक दोहरीकरण का काम नहीं हो पा रहा है। इस कारण रायपुर स्टेशन से विशाखापट्टनम मार्ग पर जाने वाली गाड़ियां आरबीएच तक सिंगल लाइन से ही आना-जाना कर रही हैं। सिंगल लाइन के चलते अक्सर गाड़ियों को आउटर में रोकना पड़ता है। बस्तियों को हटाकर उन्हें विस्थापित करने के लिए शासन जमीन मांगता रहा लेकिन रेलवे बाजार मूल्य से नीचे जमीन देने पर ही अड़ा रहा।

दशक पुराना विवाद- शासन ने मांगी थी रेलवे से जमीन, ताकि विस्थापन किया जा सके, रेलवे मुफ्त जमीन देने तैयार नहीं

2012-13 की योजना आया रेल बजट में प्रस्ताव
2012-13 के रेल बजट में रायपुर-टिटलागढ़ के दोहरीकरण की बात सामने आई थी। पहले फेज के लिए 200 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। वर्तमान में सिंगल लाइन होने की वजह रोज ट्रेनें लेट होती हैं। रायपुर-टिटलागढ़ रूट से रोज लगभग दो दर्जन ट्रेनें चलती हैं। इसमें से छह पैसेंजर ट्रेनें हैं। सिंगल लाइन होने की वजह से कई बार ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है।

बन जाएगी मेन लाइन, ट्रेनें बढ़ेंगी
रायपुर से टिटलागढ़ की दूरी दो सौ किलोमीटर है। इसे वाल्टेयर लाइन के नाम से जाना जाता है। अभी इस रूट से छह पैसेंजर और 15 एक्सप्रेस ट्रेनें रवाना होती हैं। इस मार्ग की गिनती मुख्य रूट में नहीं होती। दोहरीकरण हो जाने के बाद यह भी मेन लाइन हो जाएगी और इस रूट में यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का विकल्प खुल जाएगा।

दो रेल मंडलों को होगा फायदा
रायपुर से टिटलागढ़ तक के रूट में छत्तीसगढ़ के साथ ही ओडिशा के भी रेल यात्रियों को फायदा होगा। रायपुर और संबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत लगभग 40 स्टेशन आते हैं। इनमें से 14 स्टेशन रायपुर रेल मंडल के हैं। छत्तीसगढ़, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश को जोडने के लिए इस रेल का दोहरीकरण होना महत्वपूर्ण है। इससे कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी।

रेलवे की करीब 8 हेक्टेयर जमीनों पर सात बस्तियां बसीं
रेलवे की करीब 8 हेक्टेयर जमीनों पर करीब सात बस्तियां बसी हैं। पिछले दिनों पंडरी मंडी गेट के पास रेलवे ने अचानक तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। लोगों को बगैर नोटिस भेजे मकान तोड़े जाने का जमकर विरोध हुआ। रेलवे अफसरों को व्यवस्थापन होने तक तोड़फोड़ न करने के लिए कहा गया।

तब अफसरों ने कार्रवाई रोक दी, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा था। व्यवस्थापन के लिए फिर हाउसिंग फॉल आल योजना के तहत शहर में बनाए गए फ्लैट आबंटित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत लोगों को सवा तीन लाख में मकान आबंटित किए जाएंगे। इसमें तकनीकी दिक्कत यह है कि इस योजना के तहत मकान आबंटित करने के लिए उनका छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना जरूरी है। बहुत से लोगों के पास यह दस्तावेज भी नहीं हैं। इसे लेकर विचार विमर्श चल रहा है।

पटरियों के दोनों तरफ हजारों लोग
ये वाल्टेयर लाइन की तस्वीर है। इसमें दोहरीकरण के लिए अभी कुछ झुग्गियों को हटा लिया गया है। जहां मुरुम वाला रास्ता दिख रहा है, वहां पटरियां बिछाई जाएंगी। लेकिन पटरियों के दोनों ओर जो झुग्गियां दिख रही हैं, उसे हटाने का प्रस्ताव है। इसमें जागृति नगर, त्रिमूर्ति नगर, कालीनगर व पार्वती नगर है, जहां हजारों लोग रह रहे हैं। जहां पटरियां बिछनी हैं, वहां से झुग्गियां हटा दी गई हैं, लेकिन अगल-बगल की ये बस्तियां भी हटेंगी…

छूट के लिए शासन को पत्र : महापौर
हाउसिंग फॉर आल योजना के तहत मकान दिए जा सकते हैं। आवेदन देने कहा गया है। मूल निवास और अन्य दस्तावेजों की शर्त है, लेकिन कई लोगों के पास दस्तावेज नहीं हैं। इसका विकल्प पता कर रहे हैं। शासन से नियमों में छूट के लिए भी पत्राचार किया जाएगा।
एजाज ढेबर, महापौर

दोहरीकरण का काम नहीं हो पा रहा
रायपुर विशाखापट्टनम मार्ग पर आरबीएच तक दोहरीकरण का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन अतिक्रमण के चलते आरबीएच से रायपुर स्टेशन तक दोहरीकरण का काम नहीं हो पा रहा है। इसलिए पटरी के किनारे के अतिक्रमण को हटाने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
विपिन वैष्णव, सीनियर डीसीएम रायपुर रेलवे मंडल