केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने दावा किया है कि साल 2025 में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम होगी। इसके लिए केंद्र सरकार अब घरेलू पेट्रोलियम उत्पादन की योजना पर काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में चावल और पानीपत में पराली से एथेनाल बनाने की योजना बनाई गई है। इससे किसानों को फायदा होगा और घरेलू पेट्रोलियम पदार्थों का उत्पादन भी होगा।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्वदेशी मेला का उद्घाटन करने पहुंचे केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली बुधवार की शाम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अरुण साव के निवास में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वर्तमान में हम पेट्रोलियम पदार्थ बाहर से मंगाते हैं, जिसके चलते पेट्रोल, डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होते हैं। तेल के भाव में परिवर्तन होने पर भारत पेट्रोलियम, इंडियन आयल और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम भारत के लिए इसकी दरें तय करते हैं। ऐसे में हम पेट्रोल डीजल गैस का दाम बढ़ाने को मजबूर हैं।
घरेलू उत्पादन पर बन रही योजना
पेट्रोलियम राज्यमंत्री ने कहा कि देश में तेल का उत्पादन नहीं होता है। देश की तीन कंपनियां मिलकर तेल का दाम तय करती हैं। नागालैण्ड और अरूणाचल प्रदेश में तेल का भण्डार है, जहां 1991 से तेल उत्पादन बंद है। जल्द इन स्थानों से तेल का उत्पादन किया जाएगा। घरेलु उत्पादन होने पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम होगी।
चावल, पलारी और बांस से बनेगा एथेनाल
पेट्रोलियम राज्यमंत्री तेली ने कहा कि छत्तीसगढ़ में चावल, असम में बांस और हरियाणा जैसे राज्यों में पलारी से एथेनाल बनाने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2023 तक असम में बांस से एथेनाल बनाने का प्रोजेक्ट तैयार हो जाएगा। इसके बाद 2025 तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में कमी आने लगेगी। इससे किसानों को भी फायदा होगा।
महंगाई के मुद्दे पर घिरे तो बचाव में कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे
केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के मुद्दे पर ऐसे घिरे कि बचाव में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाना शुरू कर दिया।
छत्तीसगढ़ मूल के हैं केंद्रीय राज्यमंत्री तेली
केंद्रीय राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ मूल के हैं। करीब 200 साल पहले उनके पूर्वज असम में जाकर बस गए थे। तब से वे असम के हो गए हैं। ठेठ छत्तीसगढ़ी में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से उनके समाज के लोग 200 साल पहले असम गए थे। वे लोग वहीं चाय के बागानों तथा आस पास बस गए। उन्होंने कहा कि काफी समय से छत्तीसगढ़ आने आना चाहते थे। लेकिन, काम की व्यस्तता के चलते उन्हें मौका नहीं मिल रहा था। आज सांसद अरुण साव के प्रयास से उन्हें छत्तीसगढ़ आने का मौका मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि असम में छत्तीसगढ़ संस्कृति और परंपरा अब भी कायम है और वे लोग समय-समय पर कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।



