छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और एमडी-एमएस करने के बाद दो साल तक गांवों में जाकर प्रैक्टिस करने का नियम है। इसके लिए सीट अलॉटमेंट के समय ही मेडिकल छात्रों से बांड भरवाया जाता है। इस बॉंड (एग्रीमेंट) के अनुसार गांवों में नहीं जाने वाले डॉक्टरों से 25 से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लिया जाता है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि एमबीबीएस और पीजी करने वाले छात्र गांवों में नहीं जाने के लिए 25 से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना अदा कर रहे हैं।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गांवों में जाकर सेवा नहीं देने या जुर्माना नहीं देने पर डिग्री ही नहीं दी जाती है। इस कड़े नियम की वजह से मेडिकल छात्र लाखों का जुर्माना अदा कर रहे। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार 5 साल में मेडिकल कॉलेजों में पेनाल्टी के रूप में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा हो गए हैं।
शादी होनी थी, नहीं गई बाहर
रायपुर के एक डॉक्टर की बेटी ने पीजी करने के बाद नेहरू मेडिकल कॉलेज में 50 लाख का जुर्माना अदा किया। दरअसल पीजी पास होने के बाद उनकी शादी होनी थी। इसलिए वो दो साल की ग्रामीण सेवा में नहीं गई।
कॉलेज बदलने दिया जुर्माना
एमबीबीएस करने के बाद एक छात्रा दो साल की ग्रामीण सेवा में नहीं गई। उनका चयन दूसरे राज्य के मेडिकल कॉलेज में अच्छी ब्रांच में हो गया था। पेनाल्टी के रूप में उन्होंने 25 लाख का जुर्माना जमा कराया।
एग्रीमेंट पूरा नहीं करने पर मिलती है प्रोविजनल डिग्री
मेडिकल पीजी व यूजी छात्राें काे बिना बांड पूरा करे पं. दीनदयाल उपाध्याय हेल्थ एंड आयुष विवि डिग्री नहीं देता। कोर्स करने के बाद उन्हें प्रोविजनल डिग्री दी जाती है। इस आधार पर छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में उनका रजिस्ट्रेशन हो जाता है। विवि प्रोविजनल डिग्री में बांडधारी छात्र लिख देता है। प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के बाद नौकरी तो मिल जाती है, लेकिन कई तरह की परेशानी भी होती है।
पोस्टिंग के लिए एप्रोच का खेल, शहर में ही रहते हैं
कोर्स पूरा होने के बाद गांवों में नहीं जाना पड़े इसलिए पोस्टिंग के लिए हाई एप्रोच का खेल भी खूब चलता है। ज्यादातर छात्र गांवों के बजाय शहरी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हैं। स्वास्थ्य विभाग से पोस्टिंग की सूची जारी होने के बाद यह खेल शुरू होता है। कुछ हफ्तों बाद एप्रोच से छात्र अपनी पोस्टिंग गांवों के बजाय शहर से लगे स्वास्थ्य केंद्रों में करवा लेते हैं। जिनकी नियुक्ति गांव में होती है वे 5 से 6 महीने काम करने के बाद एप्रोच लगाकर शहर में पोस्टिंग करवा लेते है।
2017 से सिस्टम लागू, हर वर्ग के लिए अलग जुर्माना
पिछले पांच साल के आंकड़ों से पता चला कि दो साल का बांड पूरा नहीं करने वालों में ज्यादातर दूसरे राज्यों के छात्र हैं। आल इंडिया कोटे के तहत एडमिशन लेने के बाद वे कोर्स पूरा करते हैं, लेकिन गांवों में प्रैक्टिस करने नहीं जाते। इसके बदले में वे जुर्माना दे रहे। पीजी में आरक्षित वर्ग के लिए 40 लाख व अनारक्षित के लिए 50 लाख रुपए की पेनाल्टी तय है। आल इंडिया कोटा वालों के लिए 2017 में बांड सिस्टम शुरू किया गया था।
पहले जुर्माना कम, इसलिए छात्र भी कम थे
स्टेट और आल इंडिया कोटे के छात्रों को बांड के तहत दो साल की सेवाएं देनी है। पहले जुर्माना कम था तो बाहर जाने वालों की संख्या भी कम थी। लेकिन अब पेनाल्टी बढ़ने के बाद छात्र गावों में जाकर इलाज कर रहे हैं।



