शहर में टैक्स वसूली का काम अब निजी एजेंसी संभालेगी। इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके पहले पूरे शहर की जीआईएस (ज्योग्राफिकल इन्फार्मेशन सिस्टम) सर्वे और मैपिंग होगी। इस सर्वे और मैपिंग के बाद करीब 15 हजार नई प्रॉपर्टी के जुड़ने का अनुमान है। इससे नगर निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।
मेट्रो सिटी की तर्ज पर टैक्स वसूली थर्ड पार्टी से कराने निगम प्रशासन ने सरकार से अनुमति मांगी थी। इसकी अनुमति राज्य सरकार के संबंधित मंत्रालय ने दे दी है। इसके बाद लगभग सारी औपचारिकता पूरी कर ली गई है। एक महीने के भीतर संबंधित कंपनी से निगम का अनुबंध भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद शहर में जीआईएस सर्वे का काम शुरू होगा। खास बात यह है कि लंबे समय से शहर में नई प्रॉपर्टी का सर्वे भी नहीं हुआ है। इससे निगम को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा था। वर्तमान में निगम 36 हजार प्रॉपर्टी से अलग-अलग तरह के टैक्स वसूलती है।
मकसद: सिस्टम सरल करना
अफसरों का अनुमान है कि नए सिरे से जीआईएस सर्वे के बाद इस प्रॉपर्टी की संख्या 50 हजार तक होगी। याने 15 हजार नई प्रॉपर्टी निगम की सूची में शामिल हो जाएगी। जिससे संपत्तिकर-समेकितकर सहित दूसरे टैक्स लिए जाएंगे। नगर निगम ने यह पहल राजस्व बढ़ाने और टैक्स वसूली के सिस्टम को सरल करने के उद्देश्य से किया है।
मनमानी वसूली नहीं होगी
नगर निगम में राजस्व वसूली को लेकर कई तरह की शिकायतें रही है। इसमें सबसे अधिक शिकायत टैक्स जमा करने के बाद भी रिकार्ड में दर्ज नहीं होना है। ऐसे कई मामले जांच में हैं। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया मेनुअल होने के चलते टैक्स का निर्धारण भी मनमाने ढंग से होने की शिकायतें रही हैं। निजी एजेंसी को काम देने के बाद पूरा डाटा ऑनलाइन होगा।
दावा: 40% बढ़ेगी वसूली
वर्तमान में नगर निगम राजस्व वसूली में उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही है। अफसरों ने उम्मीद जताई है कि निजी एजेंसी को वसूली का काम दिए जाने के बाद यह वर्किंग प्रॉपर होगी। इससे सालभर में टैक्स वसूली की स्थिति 40 फीसदी तक बढ़ेगी। इससे निगम को राजस्व फायदा होगा। जिससे निगम की माली हालत में बदलाव होगा।
हाईटेक सिस्टम से लैस होगी एजेंसी, हर रिकार्ड ऑनलाइन
नगर निगम प्रशासन जिस एजेंसी को टैक्स वसूली का काम दे रही है। वह हाईटेक सिस्टम से काम करेगी। टैक्स वसूली पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत हाेगी। टैक्स देते ही लोगों को उसकी पर्ची मिलेगी और उनके रिकार्ड में डाटा दर्ज हो जाएगा। जो हर रिकार्ड ऑनलाइन होगा। लोगों को पीओएस, क्यू आर कोड और ई- ट्रांजेक्शन का भी विकल्प मिलेगा। जो टैक्स जमा होते ही पूरे सिस्टम में अपडेट होगा। वर्तमान में ऐसे विकल्प से पेमेंट करने पर रिकार्ड दुरुस्त करने जैसी समस्या आती रही है या इसके लिए अतिरिक्त मेन पावर लगाना पड़ रहा है।
20 करोड़ का लक्ष्य, 6 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी
वर्तमान सत्र की बात करें तो नगर निगम में जलकर, संपत्तिकर, समेकितकर, दुकान किराया और दूसरे टैक्स को मिलाकर करीब 20 करोड़ की डिमांड है। इसके एवज में अगस्त तक निगम की राजस्व टीम ने केवल 6 करोड़ रुपए की वसूली ही की है। इन अफसरों का मानना है कि जनवरी-फरवरी में ही टैक्स वसूली में तेजी आती है। तब निगम वार्ड वार शिविर भी आयोजित करती है। लेकिन इसके पहले सालभर राजस्व वसूली कमजोर होने की वजह से स्थापना का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
शहर में आम लोगों को बड़ी सहूलियत मिलेगी
शहर में टैक्स वसूली का काम थर्ड पार्टी के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा नई प्रॉपर्टी का जीआईएस सर्वे भी किया जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है। इसकी प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है। जो एक महीने के भीतर पूरी हो जाएगी। इससे निगम के साथ आम लोगों को भी बड़ी सहूलियत मिलेगी। -डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, आयुक्त नगर निगम



