Home छतीसगढ़ एजेंट के बगैर कोई काम नहीं होता परिवहन विभाग बलरामपुर

एजेंट के बगैर कोई काम नहीं होता परिवहन विभाग बलरामपुर

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रामानुजगंज ! परिवहन विभाग बलरामपुर में पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारी पुराने ढर्र्र को छोड़ने को कतई तैयार नही है| कई बार अखबारों में खबर छपने के बाद भी कोई सबक लेना नही चाहते है जाहिर है उच्च अधिकारी का हाँथ इनके ऊपर है| इस कार्यालय में कोई नियम के साथ वाहन सम्बन्धित कार्य कराना चाहे तो उसे महीनो, वर्षो घुमाते रहेंगे मगर किसी बिचोलिये, एजेंट के मार्फ़त काम कराये तो तत्काल हो जाता है मगर उसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है| नियमानुसार परिवहन विभाग निर्धारित फीस की वकालत कारता है मगर किसी से भी पूछ सकते है की निर्धारित फीस से किसी का ड्राविंग लायसेंस या कागजात बन जाता है| पूर्व में इस बात को लेकर एक पत्रकार के साथ विवाद होने पर कलेक्टर बलरामपुर ने तत्कालीन परिवहन अधिकारी मृतुन्जय पटेल को फटकार लगाई थी| उसके बावजूद भी लगता है इनको कोई फर्क नही पड़ता | ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में अनियमितता हो आरटीओं विभाग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार को राजस्व की हानि हो रही है या ड्राईविंग लाईसेंस बनाने के नाम पर दलालों के माध्यम से अधाधुंध सरकार द्वारा नियत राशि की जगह अवैध राशि ली जा रही है। ड्राईविंग लाइसेंस बनवाने पहुंचे कई लोगों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों का ड्राईविंग लाइसेंस बनवाने के लिए महीनों भटकना पड़ रहा है मगर पड़ोसी राज्य झारखण्ड के लोगो का ड्राईविंग लाइसेंस तत्काल बनाया जा रहा है क्योंकि स्थानीय निवासी सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क ही दे रहे है जबकि बाहर के राज्यों के लाईसेंस बनवाने वाले निवासियों से अधिक राशी लेकर लायसेंस बना दिया जा रहा है| अधिकारियों से पूछने पर बताया जाता है कि आरटीओ विभाग ड्राईविंग लाइसेंस के लिए सरकार द्वारा निर्धारित फीस ही ली जा रही है अगर आप आरटीओ विभाग के दफ्तर में पहुंचे तो वहां प्रतिदिन लाईसेंस बनवाने के लिए कई दलाल मिल जायेंगे। आप सरकारी नियम के अनुसार लाईसेंस बनवाना चाहें तो आपको महीनों लग जायेंगे और दलाल के मार्फत बनवायेंगे तो चंद दिनों में मिल जायेगा।

लाईसेंस बनाने के नाम पर अवैध उगाही – आरटीओ बलरामपुर में ड्राईविंग लाइसेंस के नाम पर अनाप सनाप पैसे लिये जा रहे है। कई कई लोगों से पाच हजार से भी ज्यादा रकम ली जा रही है। ऑफिस के गलियारे में खुलेआम लेने देन करते हुए दलाल दिख जायेंगे। मगर उसी जगह मौजूद अधिकारी को ये सब नजर नहीं आता है।

झारखंड के लोगों का लाईसेंस घड़ल्ले से बनाया जा रहा है- आरटीओं बलरामपुर में स्थानीय निवासियों के लाईसेंस बनाने की रफ्तार कछुआ की गति से है मगर झारखण्ड के लोगों का लाईसेंस तीव्र गति से बनाई जा रही है। इसमें कई बलरामपुर जिले के अलावा गढ़वा के दलाल भी सक्रिय है। लाईसेंस बनाने के लिए स्थानीय निवास की आवश्यकता होती है मगर दलालों द्वारा स्थानीय निवास के लिए कई तरह के फर्जी किरायनामे छत्तीसगढ़ का बनवाकर झारखंड के लोगों को लाईसेंस जारी करवा रहे हैं। जाहिर है अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर ये हो नहीं सकता या अधिकारी जानबुझकर आंखे बंद किये हुए है या आवेदन की जांच करने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं।

एक ही व्यक्ति कई लोगों का ग्रान्टर झारखण्ड से आने वाले लोगों का लाईसेंस बनवाने के लिये जो शपथ पत्र नोटरी द्वारा बनवाया जा रहा है उसमें अस्थायी निवास प्रमाण पत्र में लगभग एक ही व्यक्ति जमीन कई लोगो का गवाह बना हुआ है। सुत्र बताते है कि आरटीओ ऑफिस के बाहर जो दलाल सक्रिय है वो ही इन लोगों का प्रमाण पत्र में गवाह बने हुये है। गढ़वा झारखण्ड के उमेश ठाकुर एवं शहजाद आलम का मकानदार के रूप में एक ही व्यक्ति बना हुआ है अगर सभी आवेदनों की सुक्षमता से जांच की जाये तो कई ऐसे लोग निकल आयेंगे जिनके घरों में ऐसे लोग कभी रहें ही नहीं। ये पैसे के लिये फर्जी किरायानामा बनाकर शासन को धोखा दे रहे हैं।

नोटरी से खुलासा हो सकता है – ड्राइविंग लाइसेंस के लिए दिए गए आवेदन में वर्तमान पता का नोटरी से सत्यापित कॉपी लगायी जाती है। अगर इन नोटरी किये गये दस्तावेज की गहन एवं निष्पक्ष जांच किया जाए तो लाइसेंस निरस्त करना पड़ सकता है। जिसमें नोटरी के माध्यम से एक ही व्यक्ति कई लोगों का मकानदार बनने का दावा करता है। कोई भी कहीं से आकर महीना दो महीना या दो-चार दिन किरायेदार बनकर ड्राइविंग लाइसेंस बनावाने का यदि पात्र हो जाता है तो यह परिवहन विभाग की मनमानी होगी। इसीलिए झारखंड बिहार के लोग मनमानी रकम देकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में कामयाब हो जा रहे है और छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नियम कायदे की भेंट चढ़ जा रहे हैं।सुचना अधिकार लगाने पर नही देते जवाब – 2020 से लायसेंस बनाने में हुए भ्रस्टाचार को लेकर सुचना के अधिकार का आवेदन देकर जानकारी मांगी गई जो आजतक नही दी गई| प्रकरण राज्य सुचना आयोग में लंबित है| इस विभाग के अधिकारी को सुचना के अधिकार को लेकर कोई जवाबदारी हो ऐसा नही लगता है |