जूम कॉल पर 900 कर्मचारियों को एक झटके में निकालने वाले अमेरिकी ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनी बेटर डॉट कॉम के सीईओ विशाल गर्ग अब खुद बुरी तरह फंस गए हैं. दरअसल, इसी कंपनी की एक पूर्व कर्मचारी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया है. न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दर्ज कराए गए इस केस में गर्ग पर इनवेस्टर्स को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है. गर्ग भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं.
Better.com के सेल्स और ऑपरेशंस की पूर्व वाइस प्रेसिडेंट साराह पियर्स ने अपने केस में दावा किया है कि सीईओ विशाल गर्ग ने इनवेस्टर्स को जोड़े रखने के लिए कंपनी के बिजनेस और उसके प्रोस्पेक्ट को गलत तरीके से पेश किया. उनका आरोप है कि गर्ग ने स्पेशल परपज एक्विजिशन कंपनी (SPAC) के साथ विलय मामले में निवेशकों को गुमराह किया. मई 2021 में यह डील हुई थी, जो अभी तक बंद नहीं हुई है. पियर्स ने मुकदमे में दावा किया है कि इन मुद्दों को उठाने के कारण में फरवरी में उन्हें कंपनी से बाहर कर दिया गया था.
7.7 बिलियन डॉलर की डील
बेटर डॉट कॉम स्पेशल परपज एक्विजिशन कंपनी ऑरोरा एक्विजिशन कॉर्प के साथ विलय के जरिये आईपीओ लाना चाहती है. इस डील की कीमत 7.7 बिलियन डॉलर थी. कोरोना महामारी के दौरान स्पेशल परपज एक्विजिशन कंपनी डील को लेकर निवेशक काफी उत्साहित थे, क्योंकि शुरुआती चरण की कंपनियां शेयर मार्केट में लिस्टेड होने जा रहीं थी. इस बीच बेटर के एक वकील ने कहा कि पियर्स के इन दावों में कोई दम नहीं है. उन्होंने कहा कि कंपनी इस मुकदमे का जोरदार तरीके से विरोध करेगी.
डेटा में हेराफेरी
बेटर डॉट कॉम ने अपनी एसपीएसी डील के प्रॉस्पेक्टस में कहा कि उसका मानना है कि 30 फीसदी लोन कस्टमर्स ने इंटरनेट ट्रैफिक के जरिये लिए. इसके लिए कंपनी को विज्ञापन आदि पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा. वहीं, पियर्स का कहना है कि कंपनी के इंटरनल डेटा से पता चलता है कि यह संख्या 12 फीसदी से अधिक नहीं है. पियर्स ने यह भी कहा है कि गर्ग ने 2022 की पहली तिमाही तक कंपनी के प्रॉफिटेबिल होने की बात कही है. जबकि सच्चाई यह है कि 2021 की चौथी तिमाही में बेटर को 18.2 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ था.



