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“गोविंद नाम ही सार है बाकी सब बेकार है” भाव रूपी भक्ति, ज्ञान रूपी वैराग्य से प्रभु को पाया जा सकता है, ग्राम पंचायत डेराडीह में चल रहा भागवत कथा का तीसरा दिवस, ध्रुव चरित्र, सती चरित्र, प्रहलाद कथा का किया गया रसपान…

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कसडोल, बलौदाबाजार। राघवेन्द्र सिंह “मेरूवाणी डाॅट इन”…

बलौदाबाजार भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड के क्षेत्र में आने वाला ग्राम पंचायत डेराडीह जहां पर सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन ग्राम वासियों के द्वारा किया गया है जहां पर व्यासपीठ गद्दी पर प्रवचन कर्ता देवी भूमिका जी (श्याम नगर धमतरी) परायण करता आचार्य पंडित श्री चंद्र मौली शर्मा जी कटगी वाले के द्वारा अनावरण किया जा रहा है आज तीसरा दिवस भगवान की भागवत कथा का रसपान देवी भूमिका के द्वारा कराया गया। जिसमें व्यासपीठ की भक्ति से देवी भुमिका ने बताया कि ज्ञान भक्ति वैराग्य की निस्वार्थ भाव से भगवान को पाया जा सकता है जिस प्रकार से ध्रुव बालक ने, प्रहलाद बालक ने,श्री कृष्ण के मित्र सुदामा ने जिस प्रकार से भगवान की आराधना अपने हृदय में हमेशा अनावरण करते रहते हुए कि उसी प्रकार से आज मनुष्य जीवन अगर कलयुग रूपी अंधकार में भी रहकर भगवान के नाम की अनावरण स्मरण करें और सत्यरूपी सागर में चलते रहे तो अवश्य ही उसे भगवान को प्राप्त करने के लिए देरी नहीं है और इस कलयुग रुपी जीवन में अगर किसी को मुक्ति प्राप्त करना है तो भगवान के नाम का ही सहारा ही सबसे सफल कृति है व्यासपीठ से देवी भुमिका ने बताया कि जिस प्रकार सृष्टि का क्रम है कि व्यक्ति का जन्म होना है तो निश्चित तौर पर भी उसे मौत आनी हैं यह भले ही होता हो कि 80 प्रतिशत लोगों की मृत्यु सही तरीके से होता है मगर 10 या 20% लोगों की मृत्यु अनावरण कई कारणों से उत्पन्न होती है मगर मृत्यु तो होती है लेकिन जो भी समय मिलता है उसमें भगवान का नाम का उच्चारण मंत्रोच्चारण जरूर करना चाहिए क्योंकि समय का कोई ठिकाना नहीं है कब ह्रदय से प्राण निकल जाए बचपना अवस्था, यौवन अवस्था उसके पश्चात बुढ़ापा अवस्था आती है मौत की घंटी बजने में देरी नहीं लगती है इसीलिए जिस प्रकार से राजा परीक्षित सात दिवस के समय में मृत्यु होने की जानकारी नारद जी से मिली तो उन्होंने तत्कालीन सुखदेव महाराज जी से भागवत कथा सात दिवस का रसपान किया और उन्हें मोक्ष प्राप्ति हुई उसी प्रकार से मुक्ति चाहिए तो जीवन में प्रभु के नाम का सहारा लेना चाहिए।

कथा को आगे बढ़ाते हुए देवी भूमिका जी ने कहा कि
,,जन्म जन्म मोहे जतन करा ही अंत नाम कब आवत नाही,,

भावार्थ से स्पष्ट होता है कि मनुष्य जो काम सदैव करते रहता है अंत में उसे ही याद करते हुए मृत्यु निर्वाह करता है मगर ऐसा व्यक्ति को नहीं करना चाहिए बल्कि समय व्यतीत होते होते जन्म से यौवन बुढ़ापा तक आ जाती है मगर व्यक्ति को जब से निद्रा अवस्था से जागृत अवस्था होती है और उनके मन में भगवान को पाने और मोक्ष प्राप्ति की लालसा उत्पन्न होती है तभी से अपने जीवन को आध्यात्मिक रूपी सागर में परिवर्तित कर लेना चाहिए और ईश्वर प्राप्ति हेतु अपनी दिनचर्या में गोविंद के नाम का जगह व्याप्त कर लेना चाहिए और इस सांसारिक रूपी दुनिया से मोह, माया,क्रोध, लालच से मन को दूर हटा कर कृष्ण नाम रूपी सागर में डूब जाना चाहिए। देवी भूमिका जी ने 07/11/ 2021 दिन रविवार से 14/11/ 2021 तक होने वाले श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आयोजन में प्रथम दिवस देवी स्थापना, कलश यात्रा, भागवत की महिमा, गोकर्ण कथा का वर्णन किया दूसरे दिवस में 24 अवतार विराट दर्शन, सुखदेव जी प्राकट्य, परीक्षित जी का जन्म की कथा तथा आज तीसरे दिवस में कपिल देव,सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार की कथा का रसपान डेराडीह ग्राम पंचायत में रसपान कराए।भागवत कथा प्रांगण में मुख्य रूप से मुख्य अतिथि श्री श्री 108 श्री महंत रामसुंदर दास जी महंत जो विधायक चंद्र देव राय बिलाईगढ़ के साथ कथा प्रारंभ दिवस में उपस्थित थे आज डेराडीह उपसरपंच कमला देवी चंद्रभान साहू के साथ आयोजक समिति, समस्त ग्रामवासी तथा आसपास के क्षेत्रों से आए हुए श्रोता गण उपस्थित रहे तथा ग्राम पंचायत डेराडीह के सरपंच श्रीमती जोईस गोपाल चौहान तथा उपसरपंच श्रीमती कमला देवी चंद्रभान साहू ने कहा कि हमारे ग्राम पंचायत में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन समस्त ग्राम वासियों के द्वारा हुआ है जो वास्तव में एक अच्छी पहल है क्योंकि आज इस कल युगी रूपी अंधकार से दूर करने के लिए भगवान के नाम का उच्चारण होना जरूरी है और आज भागवत कथा हमारे ग्राम में होने से हम अपने आप को कृतार्थ महसूस करते हैं क्योंकि हमें सुनने का अवसर प्राप्त हुआ और भगवान की असीम कृपा हमारे ग्राम पंचायत में रही तो इस कार्यक्रम को प्रतिवर्ष करते रहेंगे।