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नेवी में तैनात लेफ्टिनेंट कमांडर योगेश हुए शहीद, उत्तराखंड में भूस्खलन के दौरान हो गए थे लापता.

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नेवी में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात प्रतापगढ़ (Pratapgarh) जिले के बेल्हा निवासी योगेश त्रिपाठी उत्तराखंड में भूस्खलन (Landslides) की चपेट में आकर शहीद (Martyr) हो गए. मौत की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया. उनका पार्थिव शरीर रविवार को आने की संभावना है. जेठवारा थाना क्षेत्र के बलीपुर परसन निवासी योगेश त्रिपाठी वर्ष 2001 में नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर के पद पर भर्ती हुए थे. वह मौजूदा समय में पर्वतारोहन के लिए उत्तराखंड के चमोली जनपद में गए थे. जहां दो अक्तूबर को 10 सदस्यों की टीम को 15000 फीट त्रिशूल पहाड़ी पर पर्वतारोहण करना था.

बताया जा रहा है कि चमोली में भूस्खलन हो रहा था. दो दिन पहले अचानक योगेश अपनी टीम से बिछड़ गए. टीम के लोग स्थानीय प्रशासन की मदद से उनकी तलाश कर रहे थे. शनिवार की देर शाम उनका पार्थिव शरीर भूस्खलन के मलबे में दबा मिला. इस बात की खबर उनके पैतृक घर पहुंची तो कोहराम मच गया. रविवार तक उनका पार्थिव शरीर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. घटना के बाद शहीद के गांव में सन्नाठा पसरा हुआ है.
बता दें कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. हालिया सात साल के आंकड़ों के अनुसार भूस्खलन की घटनाओं की संख्या 10 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. कुछेए साल ऐसे भी गुजरे हैं जब ये घटनाएं तीस गुना तक ज्यादा थी. वैज्ञानिक बढ़ते भूस्खलनों के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न में बदलाव और मानवीय गतिविधियों की वजह से पर्वतों के आकार और उनके ढलान में हो रहे परिवर्तन को वजह मानते हैं. डीएमएमसी के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2015 में महज 33 घटनाएं रिकार्ड की गई थी. जबकि वर्ष 2018 में यह संख्या 496, और वर्ष 2020 तक इन घटनाओं की संख्या 972 तक पहुंच गई थी. इस साल अब तक 132 भूस्खलन की घटनाएं रिकार्ड की गई हैं.