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देशभर की निचली अदालतों में 4 करोड़ से ज्‍यादा केस पेंडिंग, 1 लाख केस तो 30 साल से ज्‍यादा पुराने

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जजों के खाली पड़े पद और नई अदालतें बनाने के वादों के बीच देश की अदालतों पर मुकदमों का बोझ लगातार किस कदर बढ़ रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देशभर की निचली अदालतों (District Courts) में करीब 4 करोड़ से ज्‍यादा केस पेंडिंग हैं. इनमें सबसे ज्‍यादा तादाद क्रिमिनल मुकदमों की है, जोकि 2 करोड़ से अधिक हैं. इनमें एक लाख मुकदमें तो ऐसे हैं, जो 30 साल से ज्‍यादा समय से अदालतों में लंबित पड़े हैं. वहीं, 4.85 लाख केस 20 से 30 साल तक पुराने हैं.

नेशनल जुडिशल डाटा ग्रिड (National Judicial Data Grid ) के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में मौजूद जिला एवं तालुका अदालतों (District and Taluka Courts of India) में इस वक्‍त कुल 40338150 केस लंबित पड़े हुए हैं. इनमें 10687685 सिविल केस, जबकि 29650465 क्रिमिनल मुकदमे शामिल हैं. इनमें से कितने केस कितने सालों से अदालतों की फाइलों में धूल फांक रहे हैं, इसका आंकड़ा भी चौंकाता है.

वर्ष अवधि के हिसाब से पेंडिंग केस
0-1 साल पुराने केस : 13040003, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 32.33% हैं.
1-3 साल पुराने केस : 11756884, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 29.15% हैं.
3-5 साल पुराने केस : 6216683, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 15.41% हैं.
5-10 साल पुराने केस : 6030722, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 14.95% हैं.
10-20 साल पुराने केस : 2707449, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 6.71% हैं.
20-30 साल पुराने केस : 485135, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 1.2% हैं.
30 साल से ऊपर पुराने केस : 101274, जोकि कुल पेंडिंग केसों का 0.25% हैं.https://vastos.performoo.com/player/index.html?isPreview=undefined&vpaid=undefined&widget=false&style=1