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EPF में सालाना 2.5 लाख से ज्यादा कटता है तो दूसरा खाता खुलेगा, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर.

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने EPF जमा के ब्याज पर टैक्स गणना का नया नियम जारी कर दिया है. यह ईपीएफ में सालाना 2.5 लाख रुपए से अधिक योगदान को लेकर है. नए प्रावधन के तहत कर योग्य ब्याज की गणना के लिए प्रॉविडेंट फंड खाते के भीतर एक अलग खाता खुलेगा.

साल 2021 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जिन लोगों का ईपीएफ और वीपीएफ में सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाया जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड या CBDT ने इस साल 31 अगस्त को इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.

31 मार्च, 2021 तक का योगदान नॉन-टैक्सेबल रहेगा 
ईपीएफ में 31 मार्च, 2021 तक किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई भी योगदान नॉन-टैक्सेबल रहेगा. वित्त वर्ष 2020-21 के बाद इन दोनों ईपीएफ खातों पर ब्याज की गणना अलग-अलग होगी. वित्त वर्ष 2021-22 और उसके बाद के वित्त वर्षों के लिए प्रॉविडेंट फंड के भीतर ये दो खाते बनाए जाएंगे.

सीटीबीटी ने कहा है कि यह नियम एक अप्रैल, 2022 से प्रभावी होगा. वित्त वर्ष 2021-22 में अगर पीएफ खाते में 2.5 लाख रुपए से अधिक जमा हैं तो उस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना होगा.

 1 अप्रैल 2022 से यह नियम 
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कहा है कि 1 अप्रैल 2022 से यह नियम अस्तित्व में आ जाएंगे. वित्त वर्ष 2021-22 में अगर आपके पीएफ अकाउंट में ₹2.5 लाख से अधिक जमा है तो आपको मिलने वाले ब्याज पर आपको टैक्स चुकाना होगा. इसे आपको अगले साल के इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में भी बताना होगा. पीएफ अकाउंट में हर साल 2.5 लाख रुपये की यह लिमिट प्राइवेट एम्प्लोई के लिए है.

सरकारी स्टाफ के लिए सीमा अलग 
अगर आप सरकारी स्टाफ हैं तो EPF और VPF में योगदान की यह सीमा पांच लाख रुपये है. अगर किसी सरकारी नौकर के ईपीएफ और वीपीएफ अकाउंट में सालाना पांच लाख रुपये से अधिक रकम जमा होती है तब उसके ब्याज पर उन्हें टैक्स चुकाना पड़ेगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इस नोटिफिकेशन में कहा है कि वित्तवर्ष 2021-22 में पीएफ अकाउंट में ₹2.5 लाख से अधिक का कंट्रीब्यूशन स्टाफ की तरफ से होने पर ही उसके ब्याज पर टैक्स चुकाना पड़ेगा.