अंबिकापुर, सरगुजाकेन्द्र सरकार द्वारा जन विरोधी, किसान विरोधी,मजदूर विरोधी नीतियों के विरूद्ध सिर्फ किसान ही नही बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में किसान आन्दोलन के 6 माह पूर्ण होने के साथ सरकार की जहां चंद पूंजीपति घरानों के हाथो की कठपुतली बनकर तमाम सरकारी और संगठित क्षेत्रों को इस विषम परिस्थितियों में आपदा को अवसर बना कर बैंक कोल एलआईसी, रेल बीएसएनएल और वे तमाम संसाधन जो विगत 70 साल के इतिहास में हमारे विकास के साक्षी रहे हैं सेक्टरों को उन्हें औने पौने दामों में चंद पूंजीपति घरानों को आपदा में अवसर बनाकर बेच रही है , इतना में भी अभी वह संतुष्ट नहीं है। एक ओर जहां श्रम कानूनों का खुलेआम धज्जियां उड़ाकर श्रमिक हितों पर हमला कर उसे दिहाड़ी और बंधवा मजदूर बना देना चाहती हैं।
वही दूसरे ओर तमाम पूंजीपति घरानों की नजर भारत के कृषि क्षेत्र में उसकी नजर पड़ने का मुख्य कारण जहां भारत कृषि उत्पादन में दूसरा स्थान में है वहीं देश की संपूर्ण जीडीपी का 17-18% जो कि कृषि क्षेत्र से प्राप्त होता है। साथ ही 50%से ज्यादा रोजगार इन्ही क्षेत्रों से प्राप्त होता है। ये कॉरपोरेट हित वाली बहरी सरकार अच्छे दिन का सपना दिखाकर सभी क्षेत्रों में लूट मचा रखा है।
जहां किसान आंदोलन के 6 माह पूरे हो रहें हैं साथ ही इन जनविरोधी और करपोरेटपरस्त नीतियों को लागू करने वाली केंद्र सरकार के सात साल भी पूरे हो रहें हैं। केन्द्र की सरकार की इस काले कानून से
तमाम बड़े छोटे किसानों को शोषण ओर बढ़ेगा। किसान और मजदूरों को फिर से गुलामी की ओर धकेला जा रहा है। कोरोना महामारी में करोड़ो मजदूर अपनी नौकरी से गंवा चुके हैं केन्द्र सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में स्वास्थ्य व्यवस्था के पूरी तरह से चरमराने के फलस्वरूप कई लोग बेड, ऑक्सीजन और दवाइयों के अभाव के चलते मुत्यु को प्राप्त हुए जबकि इनमे से अधिकांश की ज़िंदगी बचाई जा सकती थी। जनता को मुफ्त वेक्सीन मुहैया कराने के बजाए उसे विदेश भेज दिया गया अब वैक्सीन के लिए लोग भटक रहे हैं। लॉकडाउन मैं दैनिक आवश्यक उपभोग की वस्तुओं की बेतहाशा वृद्धि ने गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों की कमर तोड़ लिया आवश्यक है जिला प्रशासन इस पर निगरानी रखें एवं वस्तुओं का दाम नियंत्रित करें ताकि मूल वृद्धि को रोका जा सके एवं जनता को सस्ते दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ता एवं अन्य लंबित स्वत्व की भुगतान के शीघ्र मांग की गई साथ ही अभी हाल ही में मुख्यमंत्री जी के द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के बंधन को सीमित समय के लिए शिथिल किया है यह एक सराहनीय पहल है लेकिन इससे ज्यादा जरूरी यह है कि निर्धारित समय सीमा में अनुकंपा नियुक्ति का एक भी प्रकरण लंबित ना हो ऐसी चाक-चौबंद की जाए। 26 मई 2021 समय 11:00 AM से अपने घरों में काले झंडे के साथ या काले बेज़ पहनकर सरगूजा संभाग के विभिन्न जिलों में अपने घरों में समस्त कार्यकर्ताओं ने पोस्टर प्रदर्शन आयोजित किया। जिसमे छत्तीसगढ़ किसान सभा, छत्तीसगढ़ आदिवासी एकता महासभा में बाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, रामकरण राजवाड़े, महेश कुरान, अनिल द्विवेदी, बैजनाथ सिंह, रमेश डांगी, गंगा यादव, वैजनाथ राजवाड़े, सूरज देवांगन एमपीएमआरएस यूनियन के साथी प्रवीण सिंह रघुनाथसिंह प्रकाश नारायण सिंह, शहडोल डिवीजन इंश्योरेंस एंप्लाइज यूनियन से राजेंद्रसिन्हा, सतीशसिन्हा अनूपवर्मा छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ, छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शिक्षा समिति, छत्तीसगढ़ हैंडपंप तकनीकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी कर्मचारी संघ, से रेलवे मेंस कांग्रेस के साथियों ने राज्य सरकार के अधिकारी कर्मचारी आयोजन में किरण सिंह, अनंत सिन्हा, आरके कुशवाहा, धीरेंद्र कुशवाहा, सी पी मिश्रा, अरविंद वर्मा, लच्छी पैकरा, एसपी बैंक, तिलक राम, शैलेंद्र वर्मा, हरि शंकर श्रीवास्तव, सच्चिदानंद पांडे, एमएम श्रीवस, टीडी दुबे, राजेश उपाध्याय, के आर बारी, आदित्य नंदन यादव, इख़ालाक़ खान, इसलाम अंसारी, राजेश मिश्रा आदि ने अपना विरोध दर्ज किया।इस आशय की विज्ञप्ति यूनाइटेड फोरम ऑफ ट्रेड यूनियंस के प्रवक्ता एवं छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनंत सिन्हा ने दी है।



