भारत सरकार (Indian Government) ने OTT प्लेटफॉर्म के लिए नए आईटी एक्ट (IT Act) के तहत नए नियामक नियम (Regulation rules) जारी किए हैं. इसका असर मीडिया (Media) पर जरूर पड़ने वाला है.
भारत सरकार ने OTT यानी ओवर द टॉप मीडिया सेवाओं के लिए आईटी एक्ट (IT Act) के तहत नए नियामक नियम (Regulation Rules) जारी कर दिए हैं. पिछले कुछ समय से जिस तरह से ओटीटी कंटेंट (OTT Content) पर देश में आपत्तियां जताई जा रही थीं उससे यह लगने ही लगा था कि ऐसा कुछ जल्दी ही होगा. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर ने नई दिल्ली में नेशनल मीडिया सेंटर में इसके बारे में जानकारी दी. आइए जानते हैं कि इन नए नियामकों में क्या क्या बदालव आ गए हैं.
स्ट्रीमिंग और न्यूज मीडिया पर होगी निगरानी
सरकार ने ओटीटी और सोशल मीडिया को अलग अलग रखा है इसके साथ ही स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल न्यूज मीडिया को आईटी एक्ट के दायरे में शामिल कर लिया है. नए नियामकों में सरकारी अधिकारियों की निगरानी शामिल हो रही है. इसका असर मीडिया की स्वतंत्रता को सीमित करने के तौर पर भी माना जा सकता है. इसके साथ ही निगरानी निकाय एक तरह के सेंसर के तौर पर माना जा सकता है. इसका ओटीटी की विषयवस्तु पर भी प्रभाव पड़ेगा.
आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की समयसीमा
सबसे अब बड़ा बदलाव यही है कि अब नेटफ्लिक्स जैसी ओटीटी कंपनियों को अधिकारियों द्वारा आपत्ति किए जाने पर विषयवस्तु को 36 घंटे के भीतर हटाना होगा. इसमें विषयवस्तु कोर्ट या फिर सरकार के लिए आपत्तिजनक हो सकती है. इतनी ही नहीं अश्लील सामग्री के लिए यह समय 34 घंटे है. अभी तक जो प्लेटफॉर्म अपनी विषयवस्तु को लेकर अपने ही नियम बना रहे थे, अब उनके लिए नियम सख्त हो गए हैं. वहीं अब सरकार की ट्वीट और पोस्ट पर ज्यादा पैनी निगाह होगी.
सोशल मीडिया को भी जानकारी करनी होगी साझा
अब सोशल मीडिया को 72 घंटों के अंदर अपनी जानकारी को जांच अधिकारियों से साझा करना होगा. इसका असर यह होगा कि अभी तक जो प्लेटफॉर्म जानकारी साझा करने को लेकर अपने फैसले ले रहे थे अब वे नए नियमों के दायरे में आ जाएंगे और उन्हें जानकारी साझा करनी ही होगी. यह एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
अब कंपनियों के होंगे ये अनुपालन अधिकारी
अब कंपनियों को एक मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी जो कानून के क्रियान्वयन के समन्वय के लिए एक कार्यकारी की भूमिका निभाएगा. इसके साथ एक शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति भी करनी होगी. इनका भारतीय नागरिक होना आवश्यक है और इनकी नियुक्ति स्थानीय स्तर पर करनी होगी. इसका असर यह होगा कि सरकार अब स्थानीय स्तर पर सीधे इन मामले में निपटारा कर सकते हैं. यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे विदेशी कंपनियों के स्थानीय ऑफिस भारत में होते हैं जो देश में व्यापार करते हैं.
5. पहले उत्पादनकर्ता की रखनी होगी जानकारी
कानून और व्यवस्था की स्थिति में सरकार के कहने पर इन प्लेटफॉर्म को विषयवस्तु बनाने वाले पहले उत्पादनकर्ता की जानकारी सरकार को देनी होगी. इसका सीधा असर वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, जैसी सेवाओं पर होगा. इससे एंड टू एंड एन्क्रिप्शन के कमजोर होने की स्थिति हो जाएगी.
इन नियमों से साफ जाहिर है कि सरकार ऐसी व्यवस्था चाहती है कि वह आपत्तिजनक कटेंट को जारी होने से तो रोक ही सके, इसके अलावा किसी जारी कंटेंट पर आपत्ति होती है तो उसे हटाने के लिए भी उसे आसानी हो. सरकार की मंशा कितनी ही साफ हो एक बार फिर प्राइवेसी बनाम सरकारी दखल जैसी बहसें देखने को मिल सकती हैं.



