ईरान (Iran) ने अमेरिका (America) को जल्द से जल्द परमाणु समझौते पर लौटने को कहा है. देश ने 21 फरवरी की तारीख तय की है और इससे पहले उस पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव बना रहा है.
ईरान (Iran) के विदेश मंत्री ने अमेरिका (America) से कहा है कि वह जल्द से जल्द 2015 के परमाणु समझौते पर लौटे. मोहम्मद जवाद जारिफ ने कहा है कि अगर अमेरिका ने 21 फरवरी तक अपने प्रतिबंधों में ढील नहीं दी तो देश की संसद में पारित विधेयक सरकार को परमाणु शक्ति के मुद्दे पर अपना रुख कड़ा करने को मजबूर कर देगा. इसके अलावा उन्होंने जून में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव का भी हवाला दिया है और चेताया है कि अगर कोई हार्डलाइन राष्ट्रपति आता है, तो इससे डील खतरे में पड़ सकती है.
जारिफ ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि नए ईरानी साल से पहले संसद में विधेयक और फिर राष्ट्रपति चुनाव के माहौल के चलते अमेरिका के पास समय कम होता जा रहा है. संसद ने दिसंबर में विधेयक पारित किया था जिसमें प्रतिबंधों में ढील के लिए दो महीने की डेडलाइन लागू कर दी गई थी. जारिफ ने कहा है कि अमेरिका जितना देर करेगा, उसका उतना ही नुकसान होगा. इससे लगेगा कि जो बाइडन प्रशासन डोनाल्ड ट्रंप की विफल विरासत से खुद को अलग नहीं करना चाहती.
दरअसल, ईरान के साथ जो बाइडन प्रशासन संबंध सुधारने के संकेत दे रहा है. 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म कर दिया था जिससे अमेरिका का सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की ओर झुकाव जाहिर होने लगा था. हालांकि, इस बात की अटकलें तेज हैं कि बाइडन फिर से ईरान के साथ परमाणु समझौता कर सकते हैं.
उनके प्रशासन ने यमन में ईरान समर्थित हूतियों से ‘आतंकी’ का दर्जा भी वापस ले लिया है जिसे ईरान के प्रति नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि वह हूतियों का समर्थन नहीं करता है. इस तरह से वह सऊदी अरब की नाराजगी से बचने की कोशिश कर रहा है.



