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साबुन, तेल, दंतमंजन, खाद्य तेल जैसी चीजों के लिए अब आपको कितने अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे

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Inflation: एफएमसीजी कंपनियों (FMCG Companies) का कहना है कि उनपर महंगाई का दबाव है और इसलिए दाम बढ़ाने (increased) का निर्णय लेना पड़ा. कंपिनियों के मुताबिक, लॉकडाउन और कोरोना काल के दौरान पाम तेल, नारियल, खाद्य तेलों जैसे कई कच्चे माल के दाम बढ गए हैं. ऐसे में उपभोक्ताओं को साल 2021 में पिछले साल के दाम पर सामान मुहैया कराना मुश्किल होगा.

कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच नए साल में एक बार फिर से उपभोक्ताओं (Consumers) पर महंगाई (Inflation) की मार पड़नी शुरू हो गई है. दैनिक उपयोग में आने वाले साबुन, तेल, दंतमंजन, खाद्य तेल, पैकेटबंद सामान और ब्रांडेड रेडीमेड गारमेंट्स जैसे रोजमर्रा के उपयोग वाले सामान पर अब अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं. इन सब का उत्पादन करने वाली कंपनियों ने कच्चे माल के दाम बढ़ने की वजह से अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं. सफोला और पैराशूट नारियल तेल बनाने वाली कंपनी मैरिको (Marico) ने भी अपने कुछ और प्रोडक्ट्स के दाम में इजाफा किया है. वहीं, देश की कुछ और एफएमसीजी पतंजलि, डाबर और पारले जैसी कंपनियां स्थिति पर करीबी से नजर रखे हुए हैं और दाम बढ़ाने को लेकर विचार कर रही है.

एफएमसीजी कंपनियों का क्या कहना है
एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि उनपर महंगाई का दबाव है और इसलिए दाम बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा. कुछ एफएमसीजी कंपिनियों ने कहा है कि लॉकडाउन और कोरोना काल के दौरान पाम तेल, नारियल, खाद्य तेलों जैसे कई कच्चे माल के दाम बढ गए हैं. ऐसे में उपभोक्ताओं को साल 2021 में पिछले साल के दाम पर सामान मिलना मुश्किल होगा.

हाल के दिनों में जूते-चप्पल, साबुन-तेल के साथ-साथ गारमेंट्स और अंडर गारमेंट्स, गीजर, टूथपेस्ट, डिसपोजल बैग्स जैसी रोजमर्रा के जरूरत का हर सामान के दाम बढ़ गए हैं. रोजमर्रा में काम आने वाली वस्तुएं जैसे फुटवियर, गारमेंट, वस्त्र, किचन का सामान, लगेज, हैंड बैग, कॉस्मेटिक्स, गिफ्ट आइटम, फर्निशिंग फैब्रिक, टेक्सटाइल, बिल्डर हार्डवेयर, कागज, घरेलू वस्तुएं, फर्नीचर, लाइटिंग, हेल्थ प्रोडक्ट्स, पैकेजिंग प्रोडक्ट, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन अपैरल, खाद्यान, घड़ियां, जेम्स एवं ज्वेलरी, स्टेशनरी, ऑटो पार्ट्स, यार्न, फेंगशुई आइटम्स, चश्मे, टेपेस्ट्री मैटेरियल आदि के दाम भी बढ़ गए हैं.

होम एप्लायंसेस की कीमतें भी 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं
एफएमसी कंपनियों के मुताबिक,कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी के चलते एलईडी टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित कुछ होम एप्लायंसेस की कीमतें भी 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं. कंज्यूमर ड्यरेबल बनाने वाली कंपनियों ने इसकी घोषणा पिछले साल दिसंबर में ही कर दी थी. कुछ कंपनियों ने तो अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों को 10 प्रतिशत तक बढ़ाना शुरू भी कर दिया है.

क्या कहना है कैट का
एफएमसीजी कंपनियो के दाम बढ़ाने के फैसले पर कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल (Praveen Khandelwal) कहते हैं, ‘प्रश्न यह है कि आखिर ये कंपनियां दाम क्यों बढ़ा रही हैं और दाम बढ़ाने के पीछे कारण क्या है? जिन चीजों में एफएमसीजी कंपनियां डील करती हैं, उसके दाम फिलहाल नहीं बढ़ें हैं. कोविड के बाद डिमांड में कमी ही आई हैं ज्यादा नहीं हुई हैं. डिमांड ज्यादा होने से ही सप्लाई बढ़ाने की आवश्यकता है. डिमांड कम होने के बावजूद दाम क्यों बढ़ा रहे हैं यह समझ से बाहर है. अक्सर देखा गया है कि ये कंपनियां अपनी मनमानी करके दाम बढ़ाती हैं और उसका दोष व्यापारी के सिर मढ़ा जाता है कि व्यापारी महंगा बेच रहा है. हमारे जो डिस्ट्रीब्यूटर हैं उनको 2 से 3 प्रतिशत बचता है. जो सेमीडिस्ट्रीब्यूटर्स हैं उनको 3 से 5 प्रतिशत बचता है और जो हमारा रिटेलर्स है उसको 5 से 7 प्रतिशत बचत होता है. इसलिए सस्ता आएगा तो भी हमारे चैन को 7 प्रतिशत तक ही मिलेगा और महंगा आएगा तो भी इतना ही मिलेगा. मेरा मानना है कि सरकार कोई ऐसा आथॉरिटी गठन करे जो तय करे कि अगर इन कंपनियों का दाम बढ़ाना है तो कहीं न कहीं सरकारी की अनुमिति लेना आवश्यक हो और दाम बढ़ाने के आधार क्या हैं?’

मैन्युफैक्चरर्स का ये कहना है
वहीं मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि ग्लोबल वेंडर्स से सप्लाई कम होने की वजह से टीवी पैनल्स की कीमतों में भी 200 फीसदी की वृद्धि हुई है. क्रूड की कीमतें बढ़ने के चलते प्लास्टिक भी महंगी हो गई है. इसी के चलते जनवरी से ही पैनासोनिक इंडिया, थॉमसन और एलजी जैसी कुछ और कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाने का फैसला किया था.

गौरतलब है कि नवंबर-दिसंबर महीने में कोरोना संकट, रोजगार की कमी और वेतन कटौती जैसी चुनौतियों के बावजूद आम आदमी को महंगाई से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन नए साल शुरू होते ही एफएमसी कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं.