प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर विश्वास सारंग ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क बनाने का ऐलान किया है. इस ऐलान के साथ ही पार्क को लेकर विवाद भी उठ खड़ा हुआ है.
. प्रदेश में हार्ड हिंदुत्व को लेकर तेजी के साथ आगे बढ़ रही बीजेपी अब खुद की देशभक्ति को प्रचारित करने में जुट गई है. प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर विश्वास सारंग ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क बनाने का ऐलान किया है. इस ऐलान के साथ ही पार्क को लेकर विवाद भी उठ खड़ा हुआ है.
सारंग जिस जमीन पर सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क का निर्माण करा रहे हैं वह रेलवे की जमीन है और रेलवे ने उसकी जमीन पर पार्क के निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है. कैबिनेट मिनिस्टर विश्वास सारंग की मौजूदगी में रेलवे के अधिकारियों ने रेलवे की जमीन पर पार्क के निर्माण को गैर वाजिब बताया. रेलवे की आपत्ति के बाद कैबिनेट मिनिस्टर विश्वास सारंग ने अफसरों को ही फटकार लगा दी.
इस तरह की थीम होगी पार्क की डेढ़ करोड़ की लागत से बनने वाले सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क में सुभाष चंद्र बोस के जीवन को बताया जाएगा. आजाद हिंद फौज बनाने से लेकर सुषाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी कदमों की पूरी जानकारी होगी. सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर उनके जीवन अध्याय से जुड़े पहलुओं को पार्क में दीवारों पर उकेरा जाएगा, ताकि युवा सुभाष चंद्र बोस के जीवन से रूबरू हो सकें.
कांग्रेस ने भी निशाना साधा
नरेला विधानसभा में सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क बनाए जाने को लेकर सियासत भी छिड़ गई है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि सुभाष चंद्र बोस का आजादी दिलाने में बड़ा योगदान था. लेकिन भाजपाइयों का आजादी से कोई लेना देना नहीं है. बीजेपी को बताना चाहिए कि उनके शासन में ग्वालियर में नाथूराम गोडसे की ज्ञान शाला क्यों शुरू की गई.
जल्दी नहीं थमेगा पार्क विवाद
बहरहाल हार्ड हिंदुत्व के साथ बीजेपी अपने को देशभक्त भी बताने की कोशिश में है और यही कारण है कि अब क्रांतिकारियों के जीवन से जोड़कर थीम पार्क बनाए जा रहे हैं. लेकिन राजधानी में बनने वाले सुभाष चंद्र बोस थीम पार्क को लेकर छिड़े विवाद के फिलहाल थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं.


