कुछ बैंक सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं. क्या ज्यादा ब्याज दर देखकर पैसा निवेश करना ठीक होगा, आइए जानते हैं पिछले कुछ आंकड़े क्या कहते हैं.
जमा और बचत की बात करें तो बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम बेहद पॉपुलर है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि लोग इसे सुरक्षित मानते हैं और उन्हें तय रिटर्न मिलता है. सबसे अच्छी बात है कि मार्केट लिंक्ड स्कीम नहीं होती है, इसलिए बाजार के उतार चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं होता है. हालांकि भारत में पिछले डेढ़ साल में फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स पर ब्याज दरें बेहद गिर गई हैं, बैंक एफडी पर ये दरें पिछले बीते सालों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं. लेकिन कुछ बैंक अब भी सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर बहुत अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं. क्या ज्यादा ब्याज दर देखकर पैसा निवेश करना ठीक होगा, आइए जानते हैं पिछले कुछ आंकड़े क्या कहते हैं.
Bankbazaar.com द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, यस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे कुछ बैंक FD पर 7% की उच्च दर की पेशकश कर रहे थे. यस बैंक दो से तीन साल की अवधि के लिए एफडी पर 7% की दर से ब्याज दे रहा था जबकि इंडसइंड बैंक एक से दो साल की अवधि के लिए 7% की दर से ब्याज दे रहा था.
1 साल की FD पर बैंकों की ब्याज दरें
– IndusInd Bank: 7.00%
– RBL Bank: 6.75%- LakShmi Vilas Bank – 7.00%
– IDFC First Bank: 6.00%
– Yes Bank: 6.75%
– DCB Bank: 6.90%
– Bandhan Bank: 6.00%
– AU Small Finance Bank: 5.50%
– Karur Vyasa Bank: 5.50%
– State Bank of india: 4.90%
– ICICI Bank: 5.00%
इसी तरह लक्ष्मी विलास बैंक भी एक से दो साल की अवधि के लिए 6-7% की दर से ब्याज दे रहा था. वहीं इसकी तुलना में, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे कुछ बड़े बैंक 1 करोड़ तक के जमा के लिए एक-दो साल की अवधि के लिए 4.9 से 5% की दर से ब्याज दे रहे हैं. LVB पर आए हाल ही के संकट ने एक बार फिर बैंक FD पर ज्यादा ब्याज दर से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है.
इस महीने की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने LVB का DBS बैंक इंडिया लिमिटेड (DBIL) के साथ विलय की घोषणा करते हुए कस्टमर पर 25 हजार से ज्यादा की निकासी पर एक महीने तक की रोक लगा दी थी. फिलहाल शुक्रवार को दोनों बैंकों का विलय हुआ और स्थगन हटा लिया गया, मतलब ग्राहक अपने खातों से. 25,000 से अधिक निकाल सकते हैं. हालांकि, इस घटना ने उन मुद्दों की यादों को याद दिला दिया जो कॉस्ट्यूमर्स को यस बैंक और पीएमसी बैंक के मामलों में जिनका सामना करना पड़ा था.
अक्सर यह सुझाव दिया जाता है कि निवेशकों को अपने पैसे निवेश करने से पहले किसी भी वित्तीय संस्थान के बारे में पूरी जानकारी ले लेना चाहिए. हालांकि, बैंक के बारे में इस की जांच करना एक निवेशक के लिए बेहद मुश्किल काम होता है.



