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इलेक्शन से पहले भारत-अमेरिका में हो सकते हैं कई रक्षा समझौते

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अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (DonaldTrump) के दो महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर (Mark esper) मंगलवार को भारतीय समकक्ष एस जयशंकर (S Jayashankar) और राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) से मिलेंगे. इस मुलाक़ात में दोनों देशों के बीच अहम रक्षा समझौतों से संबंधित महत्वपूर्ण ऐलान किए जा सकते हैं.

अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव (US President Election) के पहले भारत (INDIA) अमेरिका (America) के बीच रक्षा क्षेत्र में कई अहम समझौते हो सकते हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप के दो शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगी चीन की बढ़ती वैश्विक ताकत समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत के लिए भारत का दौरा करेंगे.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर मंगलवार को रणनीतिक और सुरक्षा वार्ता के लिए अपने भारतीय समकक्षों से मिलेंगेदोनों देशों के बीच 27 अक्टूबर को 2+2 वार्ता (India-US 2+2 Talks) के दौरान इसका ऐलान हो सकता है. यह बातचीत ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में सैन्य गतिरोध बना हुआ है. वार्ता के पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह अग्रणी क्षेत्रीय शक्ति और वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरते भारत का स्वागत करता है. अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (US security Council) में भारत के अगले कार्यकाल के दौरान उसके साथ प्रगाढ़ सहयोग को लेकर आशावान है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ भारत और अमरीका के बीच आगामी 2 + 2 मंत्रीस्तरीय संवाद चार विषयों पर केंद्रित होगा -क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, रक्षा सूचना साझाकरण, सैन्य सैन्य संपर्क और रक्षा व्यापार. शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मीडिया से बात करते हुए ये जानकारी दी. मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग से हमारा मतलब है कि हम क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा, सहयोग और निर्माण क्षमता के समन्वय से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं.

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ( Donald Trump ) के शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार के अन्य शीर्ष नेताओं और कारोबारी सहयोगियों से भी मिलेंगे. वार्ता के तहत अमेरिका-भारत वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा. उसने कई सैन्य तकनीक और हथियारों के साझा उत्पादन और विकास का संकेत भी दिया है.

बता दें कि यह भारत औऱ अमेरिका के बीच टू प्लस टू स्तर के तीसरे चरण की वार्ता है. टू प्लस टू के तहत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच रणनीतिक मुद्दों पर वार्ता होती है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो औऱ रक्षा मंत्री मार्कटी एस्पर नई दिल्ली में होने वाली इस वार्ता में शामिल होने के लिए भारत रवाना भी हो चुके हैं. भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर वार्ता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के आठ महीने बाद आयोजित हो रही है. ट्रंप प्रशासन में पोंपियो की अमेरिकी विदेश मंत्री के तौर पर यह चौथी यात्रा है.

दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, रक्षा और सूचना साझेदारी, सेनाओं के बीच संवाद और रक्षा कारोबार के मुद्दों पर बात करेंगे. ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, BECA करार पर आगे बढ़ते हुए भारत और अमेरिकी सेनाओं के बीच भौगोलिक सूचनाओं की साझेदारी को और मजबूत बनाया गया है. दोनों देशों की सेनाओं और रक्षा मंत्रालयों के बीच रणनीतिक सूचनाओं को साझा करने पर भी बात आगे बढ़ी है. टूप्लसटू वार्ता के दौरान इस करार पर मुहर लग सकती है. इससे पहले सितंबर 2018 में दिल्ली और 2019 में वाशिंगटन में यह वार्ता हो चुकी है.

BECA करार से अमेरिका अपने सैन्य सैटेलाइट के जरिये संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों की अहम सूचनाएं तुरंत ही भारत से साझा कर पाएगा. पिछले हफ्ते अमेरिका ने कहा था कि Ladakh में भारत-चीन के बीच गतिरोध पर उसकी पैनी नजर है. वह भारत के साथ सूचनाएं साझा कर रहा है और नहीं चाहता कि हालात और बिगड़ें.

इस महीने की शुरुआत में टोक्यो पॉम्पियो ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों के साथ क्वाड की बैठक में हिस्सा लिया था. क्वाड को चीन के प्रति प्रतिकार के रूप में देखा जाता है. आलोचकों का कहना है कि ये समूह इस पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को मज़बूत कर रहा है. अमेरिकी अगुवाई में टोक्यो में हुई बैठक में चारों देशों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर करने का संकल्प जताया. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अगले सालाना मालाबार नौसेना अभ्यास भी करेगा. 2007 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया भी इसमें शिरकत करेगा.

अमेरिकी विदेश मंत्री पोंपियो ने रविवार रात को एक ट्वीट कर कहा था कि वह भारत, श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया के दौरे पर रवाना हो रहे हैं. उन्होंने कहा था कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगी देशों के साथ मिलकर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र आवाजाही और मजबूत सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा.

क्वाड मीटिंग में माइक पोम्पियो ने कहा था, क्वाड में सहयोगी होने के नाते ये अब और भी ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि हम मिलकर अपने लोगों और सहयोगियों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के शोषण, भ्रष्टाचार और दादागिरी से बचाएँ. हमने ये दक्षिण में, पूर्वी चीन सागर, मेकांग, हिमालय, ताइवान जलडमरूमध्य में देखा है. ये तो कुछ उदाहरण भर हैं.

क्वाड बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि समूह के सभी सदस्य नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसमें क़ानून के शासन, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय समुद्रों में नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के प्रति सम्मान और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान शामिल हो