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इन दालों को मिक्स करके खाने से जल्द सुधर जाएगा बिगड़ा हुआ पाचन

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अगर आपको एसिडिटी (Acidity), कब्ज और गैस जैसी समस्या रहती है तो आप दालों (Pulses) को खाकर इस समस्या को ठीक कर सकते हैं. इसके लिए आपको हमारे द्वारा सुझाये गये उपायों को अपनाना होगा.भारतीय भोजन में दाल सबकी पसंदीदा होती है. सब्जियां तो साथ में बनती ही हैं, लेकिन दाल खाने का मजा दोगुना कर देती है. दालें पोषण से भरपूर होती हैं इसीलिए ये हमारे दैनिक आहार में भी जरूरी हैं.

डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला बताते हैं कि दालों कि दाल को आंच पर पकने के बाद भी उनके पौष्टिक तत्व खत्म नहीं होते. वहीं दालों की तासीर को ध्यान में रखकर इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है. अक्सर लोगों में इस बात को लेकर असमंजस रहता है कि किस दाल को कौन से सीजन में खाना चाहिए. यदि पाचन ठीक नहीं रहता है और बार-बार एसिडिटी, कब्ज और गैस जैसी समस्या रहती है तो महादिल दाल खाना ही सबसे बेहतर होता है

.महादिल दाल क्या होती है?
जब मूंग की दाल और मसूर की दाल को मिलाकर बनाया जाता है तो उसे महादिल दाल कहते हैं. इसका कारण यह है कि यह मिक्स दाल शरीर को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाती और पाचन में भी सुधार करती है. मूंग और मसूर की दाल की तासीर ना ज्यादा गर्म होती है, ना ठंडी होती है, इसलिए इन दालों को मिक्स करके कभी भी खाया जा सकता है.

यदि इस दाल को ठंड के मौसम में खाते हैं तो यह शरीर को गर्म करने का काम करती है और यदि गर्मी में खाते हैं तो यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है. इसके अलावा यदि किसी दाल को अकेले ही बनाकर खाया जाता है तो अपने विशेष गुण के कारण ये विशेष मौसम में ही खाने योग्य होती है. बीमारी से उठने के बाद मरीजों को अक्सर डॉक्टर मसूर की दाल खाने के लिए कहते हैं क्योंकि यह शरीर को जल्दी मजबूती दे देती है. इससे अच्छी एनर्जी मिलती है.

मूंग और मसूर के अपने-अपने गुण
मूंग और मसूर दाल के अपने-अपने कई औषधीय गुण हैं. मूंग की दाल की तासीर ठंडी होती है, वहीं साबुत मूंग की दाल की तासीर में गर्म होती है. इसके अलावा मसूर की दाल गर्म प्रकृति की होती है, वही साबुत मसूर की दाल तासीर में ठंडी होती है. मतलब साबुत दाल से दाल बनाने की प्रक्रिया तक दाल की तासीर में परिवर्तन हो जाता है.

यह बात काफी आश्चर्यजनक है. इसी तरह के विशेष गुणों के कारण महादिल दाल स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा लाभकारी मानी जाती है. डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, मूंग की दाल में प्रोटीन, फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स मैंगनीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम, तांबा, जस्ता और विटामिन बी होता है.

रोटीन से एलर्जी हो, तो भी खाई जा सकती है ये मिक्स दाल
कुछ लोगों को प्रोटीन युक्त पदार्थों के सेवन से एलर्जी होती है, लेकिन शरीर के निर्माण में प्रोटीन का नियमित सेवन करना आवश्यक होता है. ऐसे में कुछ लोग प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ लेने के बजाए प्रोटीन टैबलेट लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन इसके भी कुछ साइड इफेक्ट होते हैं. ऐसे मरीजों के लिए महादिल दाल काफी उपयोगी साबित होती है, क्योंकि अपनी मिलीजुली प्रकृति के कारण रोगी को लाभ मिल जाता है और इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए tarunpath.com जिम्मेदार नही होगा।