Home देश चीन से तनाव के बीच माइनस तापमान में भारतीय जवानों का साथ...

चीन से तनाव के बीच माइनस तापमान में भारतीय जवानों का साथ देगा ‘शक्‍करपारा’ और रूसी टेंट

48
0

India china Stand off: सैनिक ठंड में खुद को ठीक रखने के लिए देसी जुगाड़ भी अपना रहे हैं. उन्‍होंने सुपर फूड के रूप में ‘शक्करपारा’ पर भरोसा करने का फैसला किया है.

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता में बहुत कम प्रगति हुई है. इसके बाद ऐसे संकेत साफ नजर आ रहे हैं कि वास्‍तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से चीनी सैनिकों की वापसी जल्‍द नहीं होगी.

इसका मतलब यह होगा कि भारत और चीन के सैनिकों को लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहना होगा. वहीं अगले सप्ताह या अगले कुछ दिनों में लद्दाख इस तनाव वाले क्षेत्र में बर्फबारी होने की आशंका है. इससे ठंड बेहद बढ़ जाएगी और तापमान और अधिक गिरेगा. इस तापमान में टैंक और बड़े हथियार बेकार हो जाएंगे. इस दौरान सैनिकों की सहनशीलता का परीक्षण होगा. ऐसे में भारतीय सैनिकों का साथ ‘शक्‍करपारा’ देगा.

वहीं एलएसी के ऊंचे इलाकों में सर्दियों की परिस्थितियों से निपटने के लिए भारतीय सेना रूसी टेंट खरीद रही है. सूत्रों के अनुसार कानपुर में आर्डिनेंस फैक्‍टरी से इन टेंट की खरीद के लिए संपर्क किया गया है. चीन ने पैंगोंग झील और एलएसी के अन्य तनाव वाले स्‍थानों पर अस्‍थाई निर्माण किए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाउन के कारण सेना के लिए कपड़े वाले टेंट या ऐसी अन्‍य रहने योग्‍य चीजों का निर्माण करने वाले उत्‍पादक उपलब्‍ध नहीं थे. ऐसे में रूसी टेंट सबसे तेज और सबसे प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आया है. यह टेंट सइबेरिया में पड़ने वाली ठंड का सामना भी कर सकता है.

वहीं सैनिक ठंड में खुद को ठीक रखने के लिए देसी जुगाड़ भी अपना रहे हैं. आईटीबीपी के जवान लंबी तैनाती के कारण विषम मौसम और रहन-सहन को बेहतर समझते हैं. उन्‍होंने सुपर फूड के रूप में ‘शक्करपारा’ पर भरोसा करने का फैसला किया है. शक्करपारा एक उत्तर भारतीय स्‍नैक है, जो गेहूं के आटे को डीप फ्राई कर और फिर उसे शक्‍कर की चाशनी में डुबोकर बनाया जाता है. एक जवान ने इस असामान्य विकल्प के बारे में बताया कि इसमें गेहूं होता है और चीनी या शक्‍कर आपको ऊर्जा देती है. इसे बनाना और ले जाना बेहद आसान है.

दिल्ली स्थित सेना के मुख्यालय ने भी पुष्टि की है कि ‘शक्करपारा’ के बैच तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें अग्रिम पोस्टों पर भेजा जा रहा है. भारतीय सैनिकों ने जिन ऊंचाइयों पर कब्जा कर रखा है, वहां पानी की आपूर्ति दूसरी बड़ी चिंता है. कुछ अग्रिम पोस्‍ट में पाइप के जरिये पानी पहुंचाने की व्‍यवस्‍था की गई है. चुशुल में स्थानीय लोगों ने कुछ अन्य स्थानों पर भारतीय सेना को पानी ले जाने में मदद की है. लेकिन सैनिकों को सर्दियों के महीनों में जल स्रोत के रूप में बर्फ का उपयोग करने के लिए तैयार किया जाता है.