GDP दर करीब 23 फीसदी तक लुढ़कने के बाGDP दर करीब 23 फीसदी तक लुढ़कने के बाद अब मोदी सरकार जल्द ही दूसरे राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है. दूसरा राहत पैकेज मध्यम वर्ग और छोटे कारोबार पर केंद्रित होगा. इस समय डिमांड को बूस्ट करना अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. अब मोदी सरकार जल्द ही दूसरे राहत पैकेजका ऐलान कर सकती है. दूसरा राहत पैकेज मध्यम वर्ग और छोटे कारोबार पर केंद्रित होगा. इस समय डिमांड को बूस्ट करना अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.
अर्थव्यवस्था को एक बार फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार दूसरे राहत पैकेज पर काम कर रही है. दूसरा राहत पैकेज देश के मध्यम वर्गीयआबादी और छोटे कारोबार पर फोकस होगा. कुछ दिन पहले ही मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यम ने कहा था कि बहुत जल्द ही दूसरे राहत पैकेज की उम्मीद की जा सकती है. उनका यह बयान अब अर्थव्यवस्था को रिवाइव करने के लिए मोदी सरकार की कवायदों से मेल खाते हुये दिखाई दे रहा है. सरकार का मानना है कि मौजूदा स्थिति में दूसरा राहत पैकेज का ऐलान अधिक फायदेमंद होगा, क्योंकि अब लॉकडाउन खत्म हो चुका है और अधिकतर राज्यों में कारोबार व अन्य सेवाएं खुल चुके हैं.
वित्त मंत्रालय में बैठकों का दौर
वित्त मंत्रालयमें लगातार बैठकों का दौर चल रहा है ताकि अर्थव्यवस्था को रिवाइव करने के लिए सही रास्ता निकाला जा सके. बीते दो महीनों में कई बैठके हुई हैं. हाल ही में आधिकारिक जीडीपी आंकड़े सामने आने के बाद सरकार की अलोचना भी हुई है. अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर -23.9 फीसदी रही है. भारत दुनियाभर के उन देशों में से एक बन चुका है, जहां अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा झटका लगा है.
GDP दर के आंकड़े सामने आने के बाद अब माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय आगे आने वाली चुनौतियों के बारे में सतर्क है. चालू वित्त वर्ष की अन्य तिमाहियों में जीडीपी में कोई सुधार के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. कई एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 7 से 9.5 फीसदी तक लुढ़क सकती है. हाल ही वित्त मंत्रालय में हो रही बैठकों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर है. इन बैठकों में पीएमओ के अधिकारी भी भाग ले रहे हैं.
डिमांड को बूस्ट करना सबसे बड़ी चुनौती
फेस्टिव सीजन आने वाला है. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि बाजार में मांग को बूस्ट मिलेगा. अर्थव्यवस्था में मौजूदा स्थिति को बेहतर करने के लिए मांग में इजाफा होना बेहद जरूरी है कि सरकारी अधिकारी लगातार कॉरपोरेटल लीडर्स के साथ बैठक कर रहे हैं तो आर्थिक रिकवरी के लिए आगे का खाका तैयार किया जा सके. कॉरपोरेट लीडर्स ने अपने सलाह में प्रमुखता से इस बात पर जोर दिया है कि मांग में गिरावट ही मौजूदा समय की सबसे बड़ी चुनौती है.
मध्यम वर्ग और छोटे कारोबार पर फोकस
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नये राहत पैकेज में सरकार मध्यम वर्गीय आबादी और छोटे कारोबार पर विशेष रूप से फोकस कर रही है. बता दें कि पहले राहत पैकेज के ऐलान के दौरान भी सरकार ने कहा था कि यह अंतिम राहत पैकेज नहीं होगा. फिलहाल सरकार नये राहत पैकेज पर काम कर रही है.
एमएसएमई सेक्टर के लिये भी हो सकते हैं नये ऐलान
नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों समेत प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति का भी मानना है देश के मीडिल क्लास और छोटे कारोबार को सपोर्ट की जरूरत है. ऐसे में अब कयास लगाये जा रहे हैं कि इन्हीं दो सेग्मेंट पर दूसरा राहत पैकेज फोकस होगा.
इसके अतिरिक्त उम्मीद की जा रही है सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिये भी कुछ अतिरिक्त ऐलान कर सकती है.भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रीढ़ है. कई अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि भारत अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर से गुजर रही है. उनका कहना है कि डायरेक्ट राजकोषीय उपाय है समय की मांग है.



